Uttrakhand : आज सूर्य की तेज लपटों से गुजरने जा रहा है यह धूमकेतु
बच निकला तो दिन की रोशनी में नग्न आंखों से नजर आएगा धूमकेतु एमएपीएस
नैनीताल, अमृत विचार। धूमकेतु सी/2026 ए1 (एमएपीएस) शनिवार को सूर्य की लपटों के बीच से गुजरने जा रहा है। यह बचेगा या खत्म हो जाएगा, इसका पता कुछ समय बाद चलेगा। जिंदा रहा तो दिन में भी नग्न आंखों से देखा जा सकेगा। इस धूमकेतु पर दुनियाभर के खगोलविदों के साथ नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के खगोलविद भी नजर बनाए रखे हैं। इस धूमकेतु का चार अप्रैल को सूर्य के सबसे निकट (पेरिहेलियन) पहुंचना संभव है।
दरअसल, धूमकेतुओं की दुनिया में ‘धूमकेतु एमएपीएस’ इन दिनों छाया हुआ है। एक ओर नासा और इएसए की दूरबीन सोहो की नजरें इस पर टिकी हुई हैं तो वहीं, एरीज से स्थापित जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से भी इस पर नजर रखी जा रही है। इस धूमकेतु को दुर्लभ माना जा रहा है। आकार में काफी बड़ा होने के कारण उम्मीद जताई जा रही है कि यह जीवित बच निकलेगा और जीवित रहा तो दिन के उजाले में भी देखा जा सजेगा, जबकि रातों को कुछ अलग अंदाज में चमक बिखेरेगा।
गणना है कि यह धूमकेतु सूरज की सतह से लगभग 1.63 लाख किलोमीटर दूर से गुजरने वाला है। इतनी कम दूरी का मतलब सूरज की भयानक तपिश में डूब जाना है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सूर्य की तेज गर्मी के साथ सूरज का अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण से इसके अंदर के बर्फ और गैस उबलकर फट सकती है। पूर्व में धूमकेतुओं को इस तरह से फटते हुए देखा जा चुका है। जिस कारण इसके सुरक्षित बच निकलने की संभावना कम है।
हालांकि, कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि आकार में बड़ा होने के कारण यह बच निकलेगा। जिस कारण यह धूमकेतु वैज्ञानिकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस धूमकेतु को सीधा देखने की कोशिश कतई नहीं करें। जिससे आंखों के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। नासा सोहो अंतरिक्ष दूरबीन से इसका सीधा प्रसारण दिखा रहा है। यह धूमकेतु भारतीय समय के अनुसार शनिवार सुबह आठ बजे सूर्य के सर्वाधिक निकट पहुंचेगा।
इतिहास रचने को तैयार बहुचर्चित धूमकेतु एमएपीएस
नैनीताल: आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे के अनुसार बहुचर्चित धूमकेतु एमएपीएस बच निकला इतिहास बना जाएगा। सभी को इसके सूर्य करीब पहुंचने का इंतजार है। अगर यह बच निकला तो सूर्य की तेज रोशनी से बाहर आते ही कुछ दिन बाद चमक बिखेरने लगेगा। बहरहाल अभी इसके भविष्य को लेकर कहना मुश्किल है।
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (जेडब्ल्यूएसटी), नासा, ईएसए और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी का एक संयुक्त मिशन है। इसके माध्यम से 2021 से अंतरिक्ष के रहस्यों को उजागर किया जा रहा है। नैनीताल स्थित एरीज संस्थान सौर मंडल से बाहर के एक दुर्लभ धूमकेतु (3I/एटलस) के अध्ययन में भी अंतर्राष्ट्रीय खगोलविदों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है।
