क्लास 9-10 में बड़ा बदलाव! छात्रों को मिलेगा स्पेशल मौक... अब मैथ्स और साइंस में होंगे दो स्तर.. स्टैंडर्ड और एडवांस्ड
लखनऊ, अमृत विचारः केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए करिकुलम में एक महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी कर ली है। अब छात्रों को गणित (मैथ्स) और विज्ञान (साइंस) विषयों को दो अलग-अलग स्तरों स्टैंडर्ड और एडवांस्ड पर पढ़ने का विकल्प मिलेगा।
स्टैंडर्ड vs एडवांस्ड: कैसे होगा सिस्टम?
- स्टैंडर्ड लेवल: यह सभी छात्रों के लिए अनिवार्य होगा। परीक्षा 80 अंकों की होगी, जिसकी अवधि 3 घंटे रहेगी। यह मौजूदा पैटर्न के समान होगा।
- एडवांस्ड लेवल: जो छात्र इन विषयों को गहराई से समझना चाहते हैं या भविष्य में इंजीनियरिंग, मेडिकल या साइंस स्ट्रीम में जाना चाहते हैं, वे इस स्तर को चुन सकेंगे।
एडवांस्ड स्तर के लिए 25 अंकों का एक अतिरिक्त पेपर होगा, जिसकी अवधि 1 घंटे की होगी। यह पेपर HOTS (Higher Order Thinking Skills) आधारित होगा और इसमें अतिरिक्त कंटेंट शामिल किया जाएगा। एडवांस्ड पेपर का स्कोर अलग से मार्कशीट में दर्ज किया जाएगा, लेकिन मुख्य मार्कशीट में जोड़े नहीं जाएंगे।
कब शुरू होगा एडवांस्ड एग्जाम?
CBSE चेयरमैन राहुल सिंह ने बताया कि एडवांस्ड लेवल का अतिरिक्त परीक्षा पेपर 2028 से लागू होगा। यदि कोई छात्र एडवांस्ड पेपर में 50% या उससे अधिक अंक प्राप्त करता है, तो मार्कशीट में इसका उल्लेख किया जाएगा कि उसने एडवांस्ड लेवल क्वालिफाई कर लिया है। अगर अंक कम आएं तो मार्कशीट में एडवांस्ड परीक्षा का कोई जिक्र नहीं होगा, यानी छात्र को कोई नुकसान नहीं होगा।
नए स्किल-बेस्ड विषय भी जोड़े गए
CBSE ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) 2023 के अनुरूप करिकुलम को आधुनिक बनाने के लिए कई नए विषय शामिल किए हैं। इनमें शामिल हैं:
- कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT)
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- वोकेशनल एजुकेशन
- आर्ट एजुकेशन
- फिजिकल एजुकेशन
विशेष रूप से AI और कंप्यूटेशनल थिंकिंग को वर्ष 2029 से बोर्ड परीक्षाओं में अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाएगा।
बोर्ड ने ऑप्शनल विषयों की संख्या भी कम करने का फैसला किया है ताकि पाठ्यक्रम में अनावश्यक दोहराव कम हो और छात्रों को अकादमिक तथा स्किल-बेस्ड विषयों के बीच बेहतर संतुलन मिल सके।
NEP का उद्देश्य छात्रों को जल्दी पता चले अपना रुझान
CBSE चेयरमैन राहुल सिंह ने कहा, "यह बदलाव छात्रों को क्लास 9-10 में ही यह समझने का मौका देगा कि वे गणित और विज्ञान को हायर लेवल पर पढ़ना चाहते हैं या नहीं। इससे उन्हें अपना ऐप्टीट्यूड (रुझान) जल्दी पता चल जाएगा।"
उन्होंने आगे कहा, "माता-पिता बच्चों को एडवांस्ड लेवल लेने के लिए कह सकते हैं, लेकिन हमारा उद्देश्य बच्चों पर स्ट्रेस बढ़ाना नहीं है। छात्र चाहें तो एडवांस्ड लेवल लें, न लें, या फिर सिर्फ एक विषय (मैथ्स या साइंस) में एडवांस्ड चुनें।"
क्या है मुख्य उद्देश्य
इन बदलावों से छात्रों को करियर-रेडी और मल्टी-स्किल्ड बनाना है। आने वाले 5 वर्षों में ये परिवर्तन भारतीय स्कूली शिक्षा व्यवस्था को काफी हद तक आधुनिक और स्किल-उन्मुख बना देंगे।
यह बदलाव छात्रों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार पढ़ाई करने की आजादी देगा, साथ ही भविष्य के लिए बेहतर तैयारी करेगा।
