World no Tobacco Day: तंबाकू आपको कूल नहीं, अपनी लत का गुलाम बनाता है-डॉ. अर्जुन अग्रवाल

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Published By Monis Khan
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शौक या मौत : तंबाकू दुनिया में हर साल लाखों लोगों की मौत की जिम्मेदार,  जिंदगी होती राख और परिवार तबाह

अमृत विचार ने रोहिलखंड कैंसर इंस्टीट्यूट, बरेली के निदेशक एवं सीनियर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अर्जुन अग्रवाल ने तंबाकू, गुटखा और ई-सिगरेट के बढ़ते चलन और इससे होने वाले जानलेवा नुकसानों को लेकर विस्तृत बातचीत की।

बरेली।अमृत विचार ने रोहिलखंड कैंसर इंस्टीट्यूट, बरेली के निदेशक एवं सीनियर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अर्जुन अग्रवाल ने तंबाकू, गुटखा और ई-सिगरेट के बढ़ते चलन और इससे होने वाले जानलेवा नुकसानों को लेकर विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस सीधी बातचीत के मुख्य अंश...

क्या तंबाकू सच में कैंसर का सबसे बड़ा कारण है?
बिल्कुल, इसमें कोई संदेह नहीं है। तंबाकू का सेवन मुंह, जीभ, गला, फेफड़े, भोजन नली, पेट, अग्नाशय (पैनक्रियाज), किडनी, मूत्राशय और गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) सहित कई तरह के कैंसर का जोखिम अत्यधिक बढ़ा देता है। हमारे देश और विशेषकर उत्तर प्रदेश में गुटखा, खैनी, जर्दा और पान मसाला का बढ़ता सेवन एक बेहद गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।

गुटखा और खैनी, सिगरेट से कम खतरनाक हैं?
यह समाज में फैला सबसे बड़ा भ्रम है। चबाने वाला तंबाकू सीधे मुंह की अंदरूनी परत (म्यूकोसा) के संपर्क में रहता है। इससे मुंह के अंदर सफेद या लाल पैच (दाग) बनना, मुंह का कम खुलना (फाइब्रोसिस), लगातार जलन, छाले होना और आगे चलकर यही लक्षण मुंह के कैंसर में बदल जाते हैं।

मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
कुछ प्रमुख संकेतों को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। मुंह में कोई भी ऐसा छाला जो तीन सप्ताह से अधिक समय में भी ठीक न हो। मुंह के भीतर सफेद या लाल रंग के दाग-धब्बे पड़ना। गाल या जीभ पर किसी तरह की गांठ का महसूस होना। मुंह खोलने, चबाने या कुछ भी निगलने में कठिनाई होना।आवाज में अचानक बदलाव आना या गर्दन में कोई गांठ उभरना प्रारंभिक संकेत माने जा सकते हैं।

युवा पीढ़ी के लिए आपका सबसे बड़ा संदेश क्या है?
युवा यह बात गांठ बांध लें कि तंबाकू आपको ‘कूल’ नहीं बनाता, बल्कि आपको अपने नियंत्रण में ले लेता है। जो चीज़ आपको बार-बार अपनी ओर खींचती है, वह असल में आपसे आपकी स्वतंत्रता और आपका अनमोल जीवन छीन रही है। नशे के इस दिखावे से दूर रहें।

क्या सालों से तंबाकू खा रहा व्यक्ति यदि इसे छोड़ता है, तो सच में कोई फायदा होता है?
शत-प्रतिशत फायदा होता है। तंबाकू छोड़ने के तुरंत बाद शरीर में रिकवरी शुरू हो जाती है। समय के साथ पुरानी खांसी ठीक होती है, सांस लेने में आसानी होती है, स्वाद और ऊर्जा का स्तर बढ़ता है। हृदय और फेफड़ों का स्वास्थ्य बेहतर होने से भविष्य  में होने वाली जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना कम हो जाता है।

क्या ‘कभी-कभी’ या बहुत कम मात्रा में तंबाकू लेना सुरक्षित है? 
चिकित्सा विज्ञान में तंबाकू का कोई भी स्तर सुरक्षित नहीं माना गया है। ‘कभी-कभी’ का शौक ही धीरे-धीरे आदत बनता है और फिर वही आदत गंभीर लत का रूप ले लेती है। चूंकि इसका नुकसान शरीर को धीरे-धीरे होता है, इसलिए शुरुआती दौर में इसके घातक प्रभाव दिखाई नहीं देते।

क्या आजकल युवाओं में बढ़ रहा वेपिंग या ई-सिगरेट का चलन एक सुरक्षित विकल्प है?
कतई नहीं। तंबाकू कंपनियाँ नए उत्पादों को आकर्षक फ्लेवर, आधुनिक पैकेजिंग और आक्रामक ऑनलाइन प्रमोशन के ज़रिए पेश कर विशेष रूप से युवाओं को टारगेट कर रही हैं। इसमें मौजूद निकोटीन अत्यधिक एडिक्टिव (लत लगाने वाला) होता है। इसे ‘हानिरहित फैशन’ समझना बहुत बड़ी भूल और बेहद खतरनाक है।

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