प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त चिकित्सक, केंद्रों से लौट रहे मरीज... शहर के चार स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक नहीं
सीएमओ कार्यालय में तैनात 12 विशेषज्ञ सेवा देने के बजाय अफसरी में मस्त
लखनऊ, अमृत विचार : जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। एक ओर जहां शहर के चार प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की कमी बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में तैनात विशेषज्ञ डॉक्टर मरीजों का इलाज करने के बजाय प्रशासनिक कार्यों में लगे हुए हैं। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है।
दौलतगंज के शांति नगर, ट्रांसपोर्टनगर, अमराई इंदिरानगर और गोमतीनगर के भरवारा स्थित स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। इन केंद्रों पर रोजाना 10 से 20 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टर न होने के कारण उन्हें अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
सीएमओ कार्यालय में एडिशनल और डिप्टी सीएमओ समेत कुल 12 डॉक्टर प्रशासनिक पदों पर कार्यरत हैं। इनमें नेत्र रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, चेस्ट विशेषज्ञ और आर्थोपैडिक डॉक्टर शामिल हैं। एक दो को छोड़कर ज्यादातर विशेषज्ञ चिकित्सीय सेवा नहीं दे रहे। जबकि शासनादेश के मुताबिक, इन डॉक्टरों को सप्ताह में कम से कम दो दिन मरीजों को चिकित्सकीय सेवा देनी चाहिए, लेकिन इस नियम का पालन नहीं हो रहा है। स्थिति यह है कि कई सर्जन वर्षों से ऑपरेशन थिएटर तक नहीं पहुंचे हैं। लगातार प्रैक्टिस न होने के कारण उन्हें सर्जरी करने में त्रुटि का डर सता रहा है। मासिक रिपोर्ट में भी उनका कार्य शून्य दर्ज हो रहा है, बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सीएमओ कार्यालय में तैनात डिप्लोमा इन चाइल्ड हेल्थ (डीसीएच) धारक दो डॉक्टर भी वर्षों से बच्चों के इलाज से दूर हैं और केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। पहले इन्हें अलीगंज सीएचसी में हफ्ते में दो दिन सेवाएं देने के लिए संबद्ध किया गया था, लेकिन समय के साथ यह व्यवस्था भी ठप हो गई। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि प्रशासनिक पदों पर कार्यरत डॉक्टरों को सप्ताह में दो दिन चिकित्सा सेवा देने का आदेश है। इस संबंध में सीएमओ को पत्र भेजकर नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।
