महंगाई की मार: कुर्बानी कम होने से मदरसों की टूटी कमर, दान में कमी से संकट में मदरसों का बजट
कानपुर, अमृत विचार। अमेरिका-ईरान-इजरायल के मध्य युद्ध, ईरान द्वारा हुमुर्ज पर तेल की नाकेबंदी समेत कई मुद्दों के कारण आयेदिन बढ़ रही महंगाई की मार बकरीद पर भी पड़ी है। जानवरों के दाम अधिक होने के कारण लोगों ने कुर्बानी कम कराई है जिसका असर विशेषकर मदरसों पर बुरा पड़ा है क्योंकि मदरसों की आमदनी में कुर्बानी का अहम रोल है और सालभर मदरसों का खर्च कुर्बानी और जकात के माध्यम से ही चलते हैं।
हर साल की तुलना में इस बार कानपुर नगर में ईद-उल-अजहा के मौके पर जानवरों की कुर्बानी कम हुई जिससे मदरसों का आय में बहुत फर्क पड़ा है जिससे मदरसा संचालक चिंतित हैं।
कानपुर समेत पूरे देश में 28 मई से तीन दिनों तक बकरीद पर लाखों जानवरों की कुर्बानी दी गई लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में कम जानवर कुर्बान किये गये हैं। मदरसा संचालकों का मानना है कि इस बार कम जानवर कुर्बान हुए है जिसके कारण मदरसों की आय पर भारी असर पड़ा है। हर साल बकरीद पर अपने शहर में 5 लाख से अधिक छोटे बड़े जानवर तीन दिनों में कुर्बान किये जाते हैं लेकिन इस बार इनकी संख्या 2.5 लाख तक ही सीमित रही।
अमेरिका-ईरान-इजरायल जंग से बुरा असर
अमेरिका-ईरान-इजरायल के मध्य युद्ध के कारण भी महंगाई ने पांव पसारे हैं जिससे बकरीद के मौके पर लोगों ने बकरा लेने के बजाए बड़े जानवर का हिस्सा लेने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। बताते चलें कि एक बड़े जानवर पर सात लोग एक साथ हिस्सा ले सकते हैं जबकि बकरे पर कुर्बानी मात्र एक व्यक्ति पर ही होती है।
बकरीद पर जानवरों की खाल से करोड़ों की आय
बकरीद पर जनवरों की कुर्बानी कराने वाले जानवर की खाल को मदरसा को दान दे देते हैं और मदरसे इन खाल को टेनरी आदि को बेचकर लाखों रुपये की आय करते हैं। इसी प्रकार ईद के मौके पर रोजेदार ईद की नमाज अदा करने से पहले अपने माल को शुद्ध करने के लिए 2.5 प्रतिशत जकात निकालते हैं, ये रकम भी करोड़ों में निकलती है। इसका भी बड़ा भाग मदरसों में ही जाता है। ऐसे में जकात और कुर्बानी से होने वाली मदरसों की आय से पूरे साल मदरसों में बच्चों को रहने, खाने, पढ़ने आदि का खर्च पूरा होता है।
कुर्बानी कम होने से फर्क पड़ा
इस बार महंगाई के कारण लोगों ने कुर्बानी कम कराई है जिसका सीधा असर मदरसों पर पड़ा है। अल्लाह बहुत बड़ा है, वह कोई न कोई रास्ता निकालेगा। आने वाले दिनों में सब ठीक हो जाएगा।
हाफिज अब्दुल कुद्दूस हादी, शहरकाजी एवं संचालक मदरसा इशाअतुल उलूम, कुलीबाजार कानपुर नगर
