ओटीटी : चिरैया
“चिरैया” Chirayya एक ऐसी फिल्म है, जो मनोरंजन से अधिक आपको सोचने पर मजबूर करती है। डिज्नी+ हॉटस्टार पर रिलीज इस फिल्म का मुख्य विषय मैरिटल रेप जैसा संवेदनशील और विवादित मुद्दा है, जिस पर भारत में अब भी स्पष्ट कानून नहीं है। फिल्म एक शादीशुदा जोड़े के रिश्ते के जरिए यह सवाल उठाती है कि क्या शादी के बाद भी महिला की इच्छा और सहमति का महत्व बना रहता है। विषय निस्संदेह गंभीर है, लेकिन फिल्म का ट्रीटमेंट कमजोर प्रतीत होता है। किरदारों की प्रस्तुति कई जगह अस्वाभाविक लगती है, जिससे दर्शक उनसे जुड़ नहीं पाता।
फिल्म में पितृसत्ता, फेमिनिज्म और LGBTQ जैसे मुद्दों को भी छूने की कोशिश की गई है, लेकिन इनका चित्रण कई बार एकतरफा और अतिरंजित लगता है। इससे कहानी का संतुलन बिगड़ता है और संदेश स्पष्ट नहीं हो पाता। तकनीकी पक्ष की बात करें, तो एडिटिंग सबसे बड़ी कमजोरी बनकर सामने आती है। सीन का फ्लो टूटता है और कई जगह घटनाक्रम समझना मुश्किल हो जाता है। निर्देशन, बैकग्राउंड म्यूजिक और स्क्रीनप्ले भी प्रभाव छोड़ने में असफल रहते हैं।
क्लाइमैक्स भी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता। जहां संवाद और पारिवारिक हस्तक्षेप से समाधान की उम्मीद होती है, वहां फिल्म दहेज कानून जैसे मुद्दों को जोड़कर कहानी को उलझा देती है। हालांकि यह फिल्म एक महत्वपूर्ण सामाजिक बहस जरूर शुरू करती है और दर्शकों को असहज, क्रोधित और विचारशील बनाती है, लेकिन एक प्रभावशाली फिल्म बनने के लिए सिर्फ विषय का बड़ा होना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका संतुलित और सशक्त प्रस्तुतीकरण भी आवश्यक है। कुल मिलाकर, “चिरैया” एक जरूरी मुद्दा उठाती है, पर एक मजबूत फिल्म नहीं बन पाती। समीक्षक-पंकज मुद्गल एनिवर्सरी (2026)
