वैज्ञानिक फैक्ट: आसमान में दिखने वाला रंगीन वृत्त
इंद्रधनुष प्रकृति की सबसे सुंदर और आकर्षक घटनाओं में से एक है। सामान्यतः हमें इंद्रधनुष आकाश में एक रंगीन मेहराब के रूप में दिखाई देता है, लेकिन वास्तव में यह पूरा वृत्त होता है। पृथ्वी की सतह और क्षितिज के कारण हम इसका केवल ऊपरी भाग ही देख पाते हैं। यदि कोई व्यक्ति हवाई जहाज, ऊंचे पहाड़ या हेलीकॉप्टर से आकाश की ओर देखें, तो उसे इंद्रधनुष का पूरा गोलाकार रूप दिखाई दे सकता है।
इंद्रधनुष तब बनता है जब सूर्य का प्रकाश वर्षा की छोटी-छोटी बूंदों से होकर गुजरता है। पानी की बूंदों के भीतर प्रवेश करते समय प्रकाश मुड़ता है, जिसे अपवर्तन कहा जाता है। इसके बाद प्रकाश बूंद के अंदर परावर्तित होता है और बाहर निकलते समय फिर मुड़ता है। इस प्रक्रिया में सफेद सूर्य प्रकाश अपने सात मुख्य रंगों- बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल में विभाजित हो जाता है। यही रंग मिलकर इंद्रधनुष बनाते हैं।
इंद्रधनुष को देखने के लिए सूर्य हमेशा देखने वाले व्यक्ति के पीछे होना चाहिए और सामने वर्षा की बूंदें होनी चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति का इंद्रधनुष थोड़ा अलग होता है, क्योंकि हर व्यक्ति की आंखों तक अलग-अलग बूंदों से प्रकाश पहुंचता है। यही कारण है कि दो लोग बिल्कुल एक जैसा इंद्रधनुष नहीं देखते। कई बार आकाश में दोहरे इंद्रधनुष भी दिखाई देते हैं। इसे “डबल रेनबो” कहा जाता है। इसमें दूसरा इंद्रधनुष पहले की तुलना में हल्का होता है और उसके रंग उल्टे क्रम में दिखाई देते हैं। ऐसा पानी की बूंदों के भीतर प्रकाश के दो बार परावर्तित होने के कारण होता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार इंद्रधनुष केवल पृथ्वी पर ही नहीं, बल्कि अन्य ग्रहों और चंद्रमाओं पर भी बन सकते हैं, यदि वहां वातावरण और तरल कण मौजूद हों। चंद्रमा की रोशनी से बनने वाले इंद्रधनुष को “मूनबो” कहा जाता है, जो बहुत दुर्लभ होता है। NASA सहित कई वैज्ञानिक संस्थाएं प्रकाश और वातावरण से जुड़ी घटनाओं का अध्ययन करती रही हैं। इंद्रधनुष न केवल विज्ञान का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि यह प्रकृति की सुंदरता, आशा और सकारात्मकता का भी प्रतीक माना जाता है।
