जालौन में फीस व्यवस्था बनेगी पारदर्शी: DM जारी किए दिशा-निर्देश, कहा- 60 दिन पहले करना होगा वेबसाइट-नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक 

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Published By Anjali Singh
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जालौन । उत्तर प्रदेश के जालौन में जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने निजी विद्यालयों की फीस व्यवस्था को पारदर्शी और नियंत्रित बनाने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश शुल्क विनियमन अधिनियम-2018 एवं संशोधन-2020 के तहत लागू की जा रही है। पांडे ने सोमवार को कहा कि जिले के सभी मान्यता प्राप्त विद्यालय बेसिक, माध्यमिक, सीबीएसई और आईसीएसई को नए सत्र से कम से कम 60 दिन पहले अपनी फीस संरचना वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करनी होगी। 

फीस केवल मासिक, तिमाही या छमाही किस्तों में ही ली जाएगी, वार्षिक शुल्क पर रोक रहेगी। सत्र के बीच फीस बढ़ाने पर प्रतिबंध रहेगा और प्रत्येक भुगतान की रसीद देना अनिवार्य होगा। साथ ही, विद्यालय किसी भी अभिभावक को एक ही दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। यूनिफॉर्म में बदलाव पांच वर्ष से पहले नहीं किया जाएगा। 

यदि कोई स्कूल फीस बढ़ाना चाहता है तो उसे तीन माह पहले जिला शुल्क नियामक समिति से अनुमति लेनी होगी। नियमों के उल्लंघन पर पहली बार अधिक वसूली गई फीस लौटाने के साथ 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, जबकि दोबारा उल्लंघन पर अतिरिक्त दंड का प्रावधान है। 

जिलाधिकारी ने बताया कि किताबों की खरीद में मनमानी और एमआरपी से अधिक वसूली की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। जांच के निर्देश दिए गए हैं और दोषियों पर कार्रवाई होगी। नियमों के पालन के लिए तहसील स्तर पर संयुक्त समितियां गठित की गई हैं, जिनमें एसडीएम, सीओ और खंड शिक्षा अधिकारी शामिल होंगे। ये टीमें नियमित निरीक्षण कर साप्ताहिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी। 

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