विश्व स्वास्थ्य दिवस : डिजिटल डिटॉक्स से घटेगी चिंता, दूर होगा अवसाद

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। भागदौड़ भरी जिंदगी में स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और कंप्यूटर का बढ़ता उपयोग अब लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालने लगा है। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर चिकित्सकों ने ''डिजिटल डिटॉक्स'' को अपनाने की सलाह दी है, जिससे चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं में कमी लाई जा सकती है।

डॉक्टरों का कहना है कि लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से दिमाग पर दबाव बढ़ता है, जिससे अनिद्रा, तनाव और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसे में कुछ समय के लिए डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाना बेहद जरूरी हो गया है। डिजिटल डिटॉक्स का मतलब पूरी तरह तकनीक से दूर होना नहीं, बल्कि सीमित और संतुलित उपयोग करना है। दिन में कुछ घंटे मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर व्यक्ति खुद के लिए समय निकाल सकता है। इससे मानसिक शांति मिलती है और नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है।

मनो चिकित्सक डॉ आशीष का कहना है कि रात में सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग बंद कर देना चाहिए। इससे दिमाग को आराम मिलता है और नींद जल्दी आती है। इसके अलावा परिवार के साथ समय बिताना, किताब पढ़ना, योग और ध्यान जैसी आदतें अपनाना भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है। डिजिटल डिटॉक्स से व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ती है और वह वास्तविक जीवन के संबंधों को बेहतर तरीके से समझ पाता है। सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने से तुलना और नकारात्मक सोच बढ़ती है, जिससे अवसाद का खतरा भी बढ़ जाता है।

जिला अस्पताल मन कक्ष प्रभारी डॉ आशीष सिंह ने बताया कि आज के समय में लोगों का स्क्रीन टाइम बहुत बढ़ गया है। लोग 10 घंटे से भी अधिक मोबाइल और सोशल मीडिया पर रहने लगे हैं। इससे तनाव, चिंता, अवसाद के साथ हीनभावना जैसी बीमारियां भी बढ़ रही हैं। डिजिटल डिटॉक्स से मन शांत रहता है।

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