सड़क सुरक्षा में यूपी की बड़ी कामयाबी: हादसों में आई 7.43 % की कमी, 450 से ज्यादा लोगों की जान बची 

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए लागू की गई 'जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' (जेएफडी) योजना के सकारात्मक परिणाम आने लगे हैं। जनवरी 2026 से प्रदेश के सभी 7 पुलिस कमिश्नरेट सहित 68 जिलों के 487 दुर्घटना बाहुल्य थानों में लागू इस योजना के चलते 7.43 फीसद लोगों की जान बचाने में सफलता मिली है। 

मंगलवार को पुलिस के राज्य मुख्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्णा ने कहा कि समीक्षा में सामने आया है कि वर्ष 2025 की तुलना में वर्ष 2026 में सड़क दुर्घटनाओं में 7.43 फीसद की कमी, मृतकों की संख्या में 11.55 की कमी और घायलों की संख्या में 8.05 फीसद की कमी दर्ज की गई है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की कुल 88 प्रशासनिक इकाइयों में से 56 इकाइयां (63.6 फीसद) दुर्घटनाओं के मामले में ग्रीन जोन में पहुंच गई हैं, जबकि 66 इकाइयां (75 फीसद) मृतकों की संख्या में कमी के साथ ग्रीन जोन में हैं। 

उन्होंने बताया कि योजना के तहत 487 थानों में 573 क्रिटिकल कॉरिडोर (सीसी) टीमें गठित की गईं, जिन्हें स्पीड लेजर गन, ब्रेथ एनालाइजर और डेसीबल मीटर जैसे आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए थे। डीजीपी ने कहा कि योजना के तहत वर्ष 2026 की पहली तिमाही में अब तक करीब 450 लोगों की जान बचाई गई, यानी प्रतिदिन औसतन 5 लोगों की जान बची है।

वहीं दुर्घटनाओं की संख्या में भी कमी आई है, जो प्रतिदिन लगभग 5-6 हादसों की कमी को दर्शाती है। वहीं प्रदेश के 18 परिक्षेत्रों में से 13 और 8 जोन में से 6 जोन में दुर्घटनाओं और मृतकों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। 

उन्होने कहा कि तीन या उससे अधिक मौतों वाली दुर्घटनाओं को "स्पेशल रिपोर्ट (एसआर)" घोषित किया गया है, जिससे जांच की गुणवत्ता में सुधार होगा। इस दौरान हाल ही पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर यूपी में साजिश फैलाने के आरोप में चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बारे में पूछने पर डीजीपी ने कहा कि हाल के मामलों में एटीएस सभी कड़ियों को खंगाल रही है और जांच आगे बढ़ रही है। "कोई भी दोषी बचेगा नहीं," इस बात को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि जांच के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। 

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