Bareilly: ऑस्ट्रेलियन मेरिनो भेड़ से कमा रहे लाखों रुपये, इंजीनियरिंग पढ़कर मिट्टी से जुड़े छत्रपाल
महिपाल गंगवार, बरेली। बड़ी संख्या में युवा भविष्य के लिए जोखिम से बचने और स्थाई आमदनी के लिए नौकरियों के पीछे दौड़ रहे हैं वहीं कुछ युवा ऐसे हैं जाे खुद ही अपना भविष्य गढ़ रहे हैं। बरेली के डीडीपुरम स्थित आनंद विहार कालोनी निवासी 38 वर्षीय छत्रपाल सिंह ने भी अपने सपनों के साथ उड़ान भरकर पशुपालन को एक हाईटेक बिजनेस मॉडल में बदल दिया है।
एमटेक की डिग्री हासिल करने के बाद छत्रपाल ने किसी दफ्तर में बैठने के बजाय बिथरी के मोहनिया गांव में अपनी 18 बीघा जमीन पर अपना भविष्य बुना। उन्होंने यहां विदेशी नस्ल की भेड़ों का एक अत्याधुनिक फार्म बनाया है, जो मिसाल बनकर उभरा है। खुद को कुशल बनाने के लिए उन्होंने आईवीआरआई से डेयरी, पोल्ट्री और गोट फार्मिंग का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद पशुपालन के क्षेत्र में जिले के सफल उद्यमी बनकर उभरे हैं।
छत्रपाल अपने फार्म पर विशेष रूप से ''ऑस्ट्रेलियन मेरिनो'' नस्ल के मेंढ़े तैयार कर रहे हैं। इन मेंढ़ों को वह विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों से मंगाते हैं और एक साल तक उनकी वैज्ञानिक तरीके से देखरेख करते हैं। छत्रपाल बताते हैं कि मेरिनो भेड़ पालना मुनाफे का सौदा इसलिए है क्योंकि यह डबल इनकम देती है। इनका मांस बाजार में 400 से 450 रुपये प्रति किलो बिकता है, वहीं इनकी ऊन बेहद उम्दा क्वालिटी की होती है। इन भेड़ों के जरिये वह आज सालाना 10 से 12 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं।
सरकारी योजना का मिला लाभ
छत्रपाल की इस सफलता में सरकारी सहयोग की बड़ी भूमिका रही है। तीन साल पहले उन्होंने केंद्र सरकार की नेशनल लाइवस्टॉक मिशन (एनएलएम) योजना के तहत एक करोड़ रुपये का ऋण लेकर इस बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत की। उनकी मेहनत को देखते हुए आईवीआरआई के तत्कालीन निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। अब पशुपालन विभाग ने उनका नाम केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए भी भेजा है। आज छत्रपाल न केवल खुद समृद्ध हैं, बल्कि अपने फार्म के जरिए कई अन्य लोगों को रोजगार देकर आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार कर रहे हैं।
