Justice Yashwant Verma : इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, कैश कांड में आया था नाम

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
On

नई दिल्ली। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। न्यायमूर्ति वर्मा के आवास से जले हुए नोटों के बंडल मिलने के बाद वह महाभियोग की कार्यवाही का सामना कर रहे हैं।

नौ अप्रैल को राष्ट्रपति को भेजे गए त्यागपत्र में उन्होंने कहा, ''राष्ट्रपति महोदया, मैं आपके सम्मानित कार्यालय पर उन कारणों का बोझ नहीं डालना चाहता जिनके चलते मुझे यह पत्र प्रस्तुत करना पड़ रहा है, लेकिन अत्यंत पीड़ा के साथ मैं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद से तत्काल प्रभाव से अपना त्यागपत्र दे रहा हूं। इस पद पर सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है।'' पिछले साल 14 मार्च को नयी दिल्ली स्थित न्यायमूर्ति वर्मा के आधिकारिक आवास पर जले हुए नोटों के बंडल मिलने के बाद उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय वापस भेज दिया गया था। 

यशवंत वर्मा को काफी पहले इस्तीफा दे देना चाहिए था : बार एसोसिएशन

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के इस्तीफे को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडेय ने शुक्रवार को कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा को काफी पहले इस्तीफा दे देना चाहिए था। उन्होंने 'पीटीआई भाषा' से कहा, "न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को इस्तीफा ही देना था तो काफी पहले दे देते... यह हम सभी के लिए बेहतर रहता। इससे झूठमूठ का विवाद पैदा होता रहा। इससे सभी की- उच्च न्यायालय, पूरी न्यायपालिका और स्वयं उनकी भी छवि धूमिल हुई।"

पांडेय ने कहा, "अगर वह लड़ रहे थे तो उन्हें लड़ते रहना चाहिए था, और अगर इस्तीफा देना था तो इसे शुरू में ही दिया जा सकता था। उन्होंने अब जाकर इस्तीफा दिया है तो भी यह स्वागत योग्य कदम है... उन्होंने समझदारी का काम किया।" नयी दिल्ली में न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के घर पर भारी मात्रा में जले हुए नोटों के बंडल बरामद होने के बाद वह महाभियोग का सामना कर रहे थे।

न्यायमूर्ति वर्मा ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना त्यागपत्र दे दिया। न्यायमूर्ति वर्मा के नयी दिल्ली स्थित आवास पर पिछले वर्ष 14 मार्च को जले हुए नोट बरामद होने के बाद उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय वापस भेज दिया गया था जिसका इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भारी विरोध किया था।

 

संबंधित समाचार