सिर्फ कीमती वस्तुओं की मांग से नहीं सिद्ध होता दहेज हत्या का अपराध: हाईकोर्ट

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए स्पष्ट किया है कि दहेज़ के रूप में कीमती वस्तुओं या संपत्ति की सिर्फ मांग से दहेज़ हत्या का अपराध घटित हुआ नहीं माना जा सकता। जब तक की मृतक महिला पर उत्पीड़न या क्रूरता से जुड़ी घटनाओं की स्पष्ट कड़ियां सिद्ध न हो। कोर्ट ने कहा कि दहेज़ मृत्यु के अपराध को सिद्ध करने के लिए मृत्यु और दहेज़-जनित क्रूरता या हिंसा के बीच ठोस संबंध को सिद्ध करना आवश्यक है।

यह निर्णय न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकल पीठ ने मेवालाल व दो अन्य की अपील पर पारित किया। लगभग 27 साल पुराने इस मामले में अपीलार्थियों ने सत्र अदालत द्वारा उन्हें सुनाई गई सात वर्ष की सजा और दोष सिद्धि को चुनौती दी थी। लखनऊ के बंथरा थाना क्षेत्र के अपीलार्थी संख्या 2 की पत्नी की वर्ष 1999 में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी।

उसके ससुर ने विरुद्ध दहेज की मांग न पूरी होने पर जहर देकर मृतका की हत्या कर दी।  अपील की सुनवाई में अभियुक्तों की ओर से दलील दी गई कि मृतका के शरीर पर कोई चोट नहीं मिली थी। पोस्टमॉर्टम की विसरा रिपोर्ट से ज़हर का कोई प्रमाण नहीं मिला। कोर्ट ने अपने निर्णय में प्राकृतिक मौत और अन्य कारणों से मृत्यु की विवेचना में अंतर स्पष्ट किया। 

कोर्ट ने कहा कि यदि मौत सामान्य परिस्थितियों से परे नहीं है लेकिन उसका कारण भी अस्पष्ट है, तो वह दहेज मृत्यु से संबंधित धारा 304-B आईपीसी के दायरे में नहीं आएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि साक्ष्य, पोस्ट-मार्टम रिपोर्ट और चिकित्सक की राय को ध्यान में रखते हुए, मौत की अप्राकृतिक परिस्थितियों में हुई मौत साबित नहीं हुई। दहेज़-उत्पीड़न और क्रूरता के बीच सीधा संबंध होना आवश्यक है, सिर्फ दहेज की मांग या बातचीत पर्याप्त नहीं है।

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