गर्मियों में भी ठंडा रहेगा इंजन, अपनाएं ये 5 टिप्स
गर्मियों के मौसम में दिल्ली-NCR सहित पूरे उत्तर भारत में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाता है। ऐसी भीषण गर्मी का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि आपकी बाइक के इंजन पर भी पड़ता है। लगातार गर्मी में चलने से इंजन ओवरहीट हो सकता है, जिससे पिस्टन और रिंग्स पर असर पड़ता है, बाइक की पावर घटती है और माइलेज भी कम हो जाता है। खासकर यदि आप रोजाना 50 से 100 किलोमीटर तक बाइक चलाते हैं, तो कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर आप इंजन को सुरक्षित और ठंडा रख सकते हैं। सही मेंटेनेंस, समझदारी भरी राइडिंग और छोटे-छोटे उपाय आपकी बाइक को गर्मी में भी बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करते हैं।
कूलेंट और इंजन ऑयल का रखें खास ध्यान
आजकल 150cc से ज्यादा क्षमता वाली अधिकांश बाइक्स लिक्विड-कूल्ड सिस्टम के साथ आती हैं। ऐसे में गर्मी शुरू होने से पहले कूलेंट का स्तर जरूर जांच लें। यदि यह कम हो, तो हमेशा कंपनी द्वारा सुझाया गया कूलेंट ही डालें। साधारण पानी या सस्ते विकल्प इंजन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हर 5000 किलोमीटर पर कूलेंट बदलवाना बेहतर रहता है। इसी तरह इंजन ऑयल भी गर्मी में जल्दी पतला हो जाता है। ऐसे में 10W-40 या 15W-50 ग्रेड का फुल सिंथेटिक ऑयल इस्तेमाल करना उचित है, जो उच्च तापमान में भी अपनी क्षमता बनाए रखता है। हर 3000-4000 किलोमीटर पर ऑयल बदलवाना चाहिए। एयर-कूल्ड बाइक्स में ऑयल का स्तर हमेशा सही रखें, ताकि इंजन अंदर से ठंडा बना रहे।
रेडिएटर और इंजन फिन्स की सफाई जरूरी
गर्मी के मौसम में धूल और गंदगी रेडिएटर पर जम जाती है, जिससे कूलिंग सिस्टम की कार्यक्षमता कम हो जाती है। हर 10-15 दिन में सॉफ्ट ब्रश या हल्के प्रेशर वॉश से रेडिएटर फिन्स साफ करें। अगर आपकी बाइक एयर-कूल्ड है, तो इंजन के फिन्स पर जमा गंदगी भी हटाना जरूरी है। साथ ही रेडिएटर फैन की कार्यक्षमता पर नजर रखें। यदि फैन या थर्मोस्टेट खराब हो जाए, तो इंजन का तापमान तेजी से बढ़ सकता है।
सही पार्किंग और आईडलिंग का ध्यान रखें
तेज धूप में खड़ी बाइक का तापमान बहुत तेजी से बढ़ जाता है। कोशिश करें कि हमेशा छायादार स्थान या पार्किंग शेड में बाइक खड़ी करें। यदि ऐसा संभव न हो, तो यूवी-प्रोटेक्टेड कवर का इस्तेमाल करें। लंबे समय तक ट्रैफिक में इंजन चालू रखने से भी गर्मी बढ़ती है। यदि सिग्नल पर ज्यादा देर रुकना पड़े, तो इंजन बंद कर देना बेहतर होता है। यह आदत इंजन को अनावश्यक गर्म होने से बचाती है।
टायर, ब्रेक और चेन की नियमित जांच
गर्मी में टायर का प्रेशर सामान्य से बढ़ जाता है, इसलिए सप्ताह में एक बार सुबह के समय टायर प्रेशर जरूर जांचें। सही प्रेशर इंजन पर अतिरिक्त दबाव को कम करता है। ब्रेक पैड्स अगर घिस चुके हों, तो वे ज्यादा गर्मी पैदा करते हैं, इसलिए समय पर बदलवाना जरूरी है। चेन को हर 400-500 किलोमीटर पर लुब्रिकेट करें, क्योंकि सूखी या टाइट चेन इंजन पर अतिरिक्त लोड डालती है।
स्मार्ट राइडिंग अपनाएं
तेज रफ्तार हमेशा बेहतर नहीं होती। 80-90 किमी/घंटा की स्पीड पर इंजन और हवा के बीच संतुलन बना रहता है। इससे कूलिंग बेहतर होती है। ट्रैफिक में मध्यम गति बनाए रखें और बार-बार ब्रेक व एक्सीलेरेशन से बचें। लंबी दूरी तय करते समय बीच-बीच में रुककर इंजन को ठंडा होने का समय दें।
