आशा भोसले पंचतत्व में विलीन : शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर हिंदू रीति-रिवाज से किया गया अंतिम संस्कार... फिजा में गूंजते रहेंगे गीत
मुंबई। प्रख्यात गायिका आशा भोसले का मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर सोमवार शाम हिंदू रीति-रिवाज और पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। संगीत जगत की जानी-मानी हस्ती को अंतिम विदाई देने के लिए शिवाजी पार्क के अंदर और बाहर काफी संख्या में लोग एकत्र थे। पृष्ठभूमि में आशा का गाया गीत, ''अभी ना जाओ छोड़कर...'' बज रहा था। संगीत की दुनिया पर दशकों तक राज करने वाली महान गायिकाओं की पीढ़ी में शुमार शायद वह आखिरी गायिका थीं। उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज और पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उन्हें बंदूकों की सलामी दी गयी।
'स्वर साम्राज्ञी' लता मंगेशकर की बहनों में से एक, आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया था। वह 92 वर्ष की थीं। उनकी बड़ी बहन लता का भी फरवरी 2022 में 92 वर्ष की आयु में रविवार के ही दिन निधन हुआ था। पुरोहितों ने पीले और नारंगी रंग के गेंदे के फूलों से सजी चिता के चारों ओर मंत्रोच्चार किया। भोसले के बेटे आनंद ने उन्हें मुखाग्नि दी। भोसले की पोती जनाई के आंसू रूकने का नाम नहीं ले रहे थे। बहन उषा मंगेशकर और संगीतकार भाई हृदयनाथ मंगेशकर भी वहां मौजूद थे।
दिवंगत गायिका को अंतिम विदाई देने वालों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार तथा निर्देशक रमेश सिप्पी, अभिनेता आमिर खान और विक्की कौशल शामिल थे। यह गम और गीत का क्षण था। चिता को अग्नि दिये जाने से पहले, गायक शान, सुदेश भोसले और अनूप जलोटा ने महान गायिका को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की।
आशा भोसले ने महज 10 साल की उम्र में गाना शुरू किया था और वह आठ दशक लंबे अपने करियर में लगभग 12,000 गीत गाए। सुदेश भोसले ने ''ज़िंदगी एक सफ़र है सुहाना'' गाया, वहीं शान ने ''प्यार के मोड़ पे'' गाया। ...लेकिन ऐसा करने वाले वे अकेले नहीं थे। कई प्रशंसक, प्रार्थना की मुद्रा में हाथ जोड़े हुए गीतों को सुन रहे थे।
मुंबई के लिए यह एक अविस्मरणीय दिन था। लोग सड़कों पर कतारों में खड़े थे, छतों और खिड़कियों पर एकत्र थे और सैकड़ों लोग शवयात्रा के साथ-साथ धीरे-धीरे भोसले के घर लोअर परेल से शिवाजी पार्क की ओर बढ़ रहे थे, ताकि शहर की अपनी 'आशा ताई' को उनकी अंतिम यात्रा में साथ दे सकें। आठ दशकों तक अपने गीतों से लोगों के दिलों पर राज करने वाली गायिका के अंतिम दर्शन करने के लिए उमड़ी भीड़ में ''आशा ताई अमर रहे'' के नारे गूंज रहे थे।
लाल साड़ी में अपनी खास बिंदी, और नथनी पहनी हुई भोसले की एक विशाल तस्वीर फूलों से सजे वाहन पर रखी गयी थी। इससे पहले दिन में, भोसले के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लिपटे हुए और कांच के ताबूत में उनके घर पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। उनके दशकों पुराने गीत - ''आओ हुजूर तुमको'', ''आइए मेहरबां'', ''झुमका गिरा रे'', ''दिल चीज़ क्या है'', ''ओ साथी रे'' और ''याई रे याई रे'' - पृष्ठभूमि में धीमी आवाज़ में बज रहे थे। बॉलीवुड सितारे आशा पारेख और हेलेन, रणवीर सिंह, तब्बू, संगीतकार ए आर रहमान, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर तथा नेता उद्धव ठाकरे, प्रफुल्ल पटेल और सुप्रिया सुले उन लोगों में शामिल थे, जो उनके आवास पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए थे।

गायक शान ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''आशा जी हमेशा हमारे साथ रहेंगी। उनकी आवाज़, उनके शब्द, जीवन के प्रति उनके विचार हमेशा हमें प्रेरित करते रहेंगे। उनके जैसी कोई नहीं थी, न कभी होगी। वह एक अद्वितीय, दृढ़ इच्छाशक्ति वाली शख्सियत थीं, जिन्होंने अपनी शर्तों पर जीवन जिया।'' भोसले के परिवार में उनके बेटे आनंद हैं। भोसले ने अपने दो बच्चों को खो दिया। बेटी वर्षा का निधन 2012 में हुआ और बेटे हेमंत का निधन उसके ठीक तीन साल बाद 2015 में हुआ।
ललित पंडित, जिन्होंने अपने भाई जतिन के साथ मिलकर शाहरुख खान और काजोल अभिनीत 1995 की फिल्म ''दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे'' के लिए संगीत तैयार किया था, ने भोसले को अपनी तरह का आखिरी बताया। फिल्म में भोसले के गाये गीत ''जरा सा झूम लूं मैं'' और ''अजनबी मुझको इतना बता'' शामिल थे। ललित ने कहा, ''उन्होंने गीतों की अपनी इतनी बड़ी विरासत छोड़ी है कि आने वाली पीढ़ियां उससे सीख सकती है। यह सच है कि वह आखिरी दिग्गज गायिका थीं और अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वह हमेशा हमारे दिलों में रहेंगी।''
सुदेश भोसले ने अपने बचपन की यादें ताजा करते हुए कहा, ''वह मुझे अपने शो में ले जाती थीं और एक गायिका से कहीं बढ़कर, वह मुझे अपने बच्चे की तरह प्यार करती थीं... और इतने सारे व्यक्तिगत दुखों के बावजूद, वह हमेशा सकारात्मक रहीं और जीवन में कभी हार नहीं मानी। मुझे लगता है कि उनके गीत आने वाले हजारों वर्षों तक उभरते कलाकारों को प्रेरित करते रहेंगे।''
उनकी आखिरी मुलाकात एक महीने पहले हुई थी। सुदेश ने बताया, ''उन्होंने मुझसे कहा था कि आठ सितंबर को मेरा जन्मदिन है, मैं एक शो करना चाहती हूं, लेकिन अब वो दिन कभी नहीं आएगा। अफसोस की बात यह है कि कई अच्छे गायक आएंगे, लेकिन आशा जी जैसी कोई नहीं होगी।'' भोसले को पद्म विभूषण, दादा साहब फाल्के पुरस्कार और महाराष्ट्र भूषण से नवाजा गया था।
