KGMU News: केजीएमयू में जगह-जगह कैमरे, फिर भी बढ़ीं छेड़छाड़ की घटनाएं
महिला मरीजा से छेड़छाड़ के मामले में एक हफ्ते बाद भी नहीं बनी जांच कमेटी
लखनऊ, अमृत विचार : प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शुमार केजीएमयू में छेड़छाड़ की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। महिला मरीज और तीमारदार के साथ डॉक्टर, रेजिडेंट और मेडिकल छात्राएं तक सुरक्षित नहीं हैं। प्रॉक्टोरियल बोर्ड, विशाखा कमेटी और जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद लफंगों के हौसले बुलंद हैं। दरअसल ज्यादातर मामलों में जांच के नाम पर ढिलाई नजर आती है। एक सप्ताह पहले अल्ट्रासाउंड के दौरान महिला मरीज से छेड़छाड़ के मामले में लापरवाही बरती जा रही है। अभी तक जांच कमेटी भी नहीं बनाई गई है।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के यूरोलॉजी विभाग में काकोरी मोड़ निवासी महिला इलाज के लिए आई थी। डॉक्टर ने उन्हें अल्ट्रासाउंड जांच की सलाह दी। महिला का आरोप है कि जांच के दौरान डॉक्टर ने छेड़छाड़ की। पीड़िता ने इसकी शिकायत विभागाध्यक्ष से की, लेकिन अब तक न जांच कमेटी बनी और न ही अन्य कार्रवाई हुई है। मानसिक रूप से आहत महिला अब उस विभाग में इलाज कराने से भी डर रही है। इंसाफ की आस में भटक रही महिला को कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। संस्थान के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि जानकारी मांगी गई है और जल्द ही जांच कमेटी गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में आयुष डॉक्टर दोषी मिलता है तो संबंधित कंपनी पर भी कार्रवाई होगी। संस्थान में प्रत्येक मरीज और तीमारदार के साथ ही चिकित्सक व अन्य स्टॉफ की सुरक्षा भी सर्वोपरि है। कोई में घटना होने पर तत्काल कार्रवाई की जाती है, किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं है।
पीपीपी मॉडल पर उठे सवाल
केजीएमयू के रेडियोलॉजी विभाग में आधुनिक जांच सुविधाएं, बड़ी संख्या में विशेषज्ञ डॉक्टर हैं, इसके बावजूद दो दशकों से पीपीपी मॉडल के तहत अल्ट्रासाउंड मशीनों का संचालन किया जा रहा है। आरोप है कि निजी कंपनियां मशीनें और स्टाफ उपलब्ध कराकर मोटा मुनाफा कमा रही हैं, जबकि निगरानी व्यवस्था बेहद कमजोर है।मा मले में सबसे गंभीर पहलू यह सामने आया है कि अल्ट्रासाउंड जैसी संवेदनशील जांच आयुष पद्धति के डॉक्टर जरिए की जा रही है। पीड़िता का आरोप है कि जांच उसी डॉक्टर ने की, जिसने छेड़छाड़ की। इससे मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
हाल के प्रमुख मामले
11 फरवरी 2026: पीडियाट्रिक विभाग की रेजिडेंट डॉक्टर ने एडिशनल प्रोफेसर पर कमरे में बुलाकर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। डॉक्टर को निलंबित कर जांच बैठाई गई।
13 फरवरी 2026: असिस्टेंट प्रोफेसर पर महिला डॉक्टर से छेड़छाड़ और आपत्तिजनक मैसेज भेजने का आरोप, निलंबन की कार्रवाई।
2 जनवरी 2026: नर्सिंग छात्रा ने एमबीबीएस इंटर्न पर यौन शोषण, शादी का झांसा और धमकी के आरोप लगाए। रिपोर्ट दर्ज, इंटर्नशिप रद्द।
19 दिसंबर 2025: पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर पर यौन उत्पीड़न, ब्लैकमेल और धर्म परिवर्तन के प्रयास के आरोप। आरोपी गिरफ्तार, दाखिला रद्द।
4 नवंबर 2025: सीनियर प्रोफेसर ने जूनियर फैकल्टी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया।
17 जनवरी 2025: मानसिक स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारी पर मरीज युवती से छेड़छाड़ के आरोप, नौकरी से बर्खास्त।
21 जून 2024: एमबीबीएस छात्रा ने हॉस्टल कर्मचारी पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया, संबंधित एजेंसी ब्लैकलिस्ट।
26 जनवरी 2024: नर्सिंग अधिकारी ने सहकर्मी पर यौन और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए, आरोपी का तबादला किया गया।
