एक्सप्रेसवे न बनें खतरे का गलियारा ...देशभर में सड़क सुरक्षा पर Supreme Court सख्त, जारी किये नए दिशा निर्देश 

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Published By Anjali Singh
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दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने देशभर में सड़क सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई निर्देश जारी करते हुए कहा है कि प्रशासनिक सुस्ती या बुनियादी ढांचे की कमियों के कारण एक्सप्रेसवे खतरे का गलियारा नहीं बनने चाहिए। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि देश की सड़कों की कुल लंबाई का केवल दो प्रतिशत राष्ट्रीय राजमार्ग हैं लेकिन सड़क हादसों में होने वाली मौत की कुल संख्या में इनकी हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। 

पीठ ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को सड़कें अधिक सुरक्षित बनाने के निर्देश दिए। पीठ ने कहा कि अवैध रूप से वाहन खड़ा करना या दुर्घटना संभावित स्थलों जैसे टाले जा सकने वाले खतरों के कारण एक भी व्यक्ति की जान जाना, नागरिकों की रक्षा करने में राज्य की विफलता को दर्शाता है। 

न्यायालय ने 13 अप्रैल के अपने आदेश में कहा, ''भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दिया गया जीवन का अधिकार जीवन को केवल गैरकानूनी तरीके से छीने जाने के विरुद्ध गारंटी नहीं देता, बल्कि राज्य पर यह सकारात्मक दायित्व भी डालता है कि वह ऐसा सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करे, जहां मानव जीवन सुरक्षित रहे और उसका सम्मान हो।'' 

पीठ ने राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में दो और तीन नवंबर, 2025 को हुई सिलसिलेवार सड़क दुर्घटनाओं में 34 लोगों की मौत के बाद दर्ज किए गए स्वतः संज्ञान मामले में यह आदेश पारित किया। इन दुर्घटनाओं के लिए प्रणालीगत लापरवाही और विनाशकारी बुनियादी ढांचागत विफलताओं को जिम्मेदार ठहराया गया है। 

पीठ ने देशभर के लिए निर्देश जारी करते हुए कहा, ''भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीने के अधिकार के अभिन्न हिस्से के रूप में यात्रियों की सुरक्षा को संवैधानिक दायित्व मानते हुए यह आवश्यक है कि इन अंतरिम निर्देशों के माध्यम से व्यवस्थागत मूल कारणों का समाधान किया जाए और भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए ये अंतरिम निर्देश जारी किए जाएं।'' 

पीठ ने कहा कि न्यायालय इस बात को दोहराता है कि कोई भी आर्थिक या प्रशासनिक बाधा मानव जीवन की शुचिता से अधिक महत्वपूर्ण नहीं हो सकती और यहां दी गई सख्त समयसीमा इस संवैधानिक दायित्व की तात्कालिक आवश्यकता को दर्शाती है। उसने निर्देश दिया कि वाहन खड़े करने के लिए निर्धारित स्थल को छोड़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों को कहीं भी खड़ा या रोका नहीं जाएगा। 

अदालत ने कहा कि इस निर्देश को लागू करने के लिए उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली (एटीएमएस) के जरिये राज्य पुलिस को सतर्क किया जाएगा, जीपीएस आधारित तस्वीरों को साक्ष्य बनाया जाएगा जिनमें समय दर्शाया होगा और एकीकृत ई-चालान प्रणाली का इस्तेमाल होगा। पीठ ने कहा, ''इन निर्देशों का पालन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राज्य पुलिस और राज्य परिवहन विभाग के अधिकारी एवं कर्मी करेंगे। संबंधित जिलों के जिला मजिस्ट्रेट इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करेंगे, जिसमें इन सभी एजेंसियों द्वारा नियमित निरीक्षण और गश्त का प्रावधान होगा। 

इस आदेश की तारीख से 60 दिन के भीतर इन निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।'' महत्वपूर्ण निर्देशों में से एक निर्देश यह है कि किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग के मार्ग अधिकारी क्षेत्र में किसी नए ढाबे, भोजनालय या व्यावसायिक ढांचे के निर्माण अथवा संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक रहेगी। पीठ ने निर्देश दिया, ''जिला मजिस्ट्रेट सात अगस्त, 2025 की मानक संचालन प्रक्रिया और सीएनएच अधिनियम में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार 60 दिन के भीतर सभी नए या मौजूदा अनधिकृत ढांचों को हटाना सुनिश्चित करें।'' 

अदालत ने कहा कि कोई भी विभाग, प्राधिकरण या स्थानीय निकाय राजमार्ग सुरक्षा क्षेत्र के भीतर स्थित किसी स्थल के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण या लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की पूर्व अनुमति के बिना कोई लाइसेंस, अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) या व्यापार मंजूरी न दे और न ही उसका नवीनीकरण करे। ऐसे सभी मौजूदा लाइसेंस की 30 दिन के भीतर समीक्षा की जाए। 

पीठ ने निर्देश दिया कि जिस जगह से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं, वहां संबंधित जिला मजिस्ट्रेट इस आदेश के 15 दिन के भीतर जिला राजमार्ग सुरक्षा कार्यबल का गठन करें जिसमें जिला प्रशासन, पुलिस, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण या संबंधित भूमि स्वामी एजेंसी, लोक निर्माण विभाग और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे। 

इसी तरह न्यायालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर निगरानी, गश्त, अवैध पार्किंग पर नजर रखने, उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली के संचालन, कैमरों, गति पहचान उपकरणों, आपात प्रतिक्रिया और मार्ग किनारे सुविधाओं की व्यवस्था, ट्रक के रुकने के लिए स्थलों के निर्माण, दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान एवं प्रकाश व्यवस्था और संस्थागत समन्वय के लिए भी निर्देश जारी किए।

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