मातृ मृत्यु दर घटाने में क्लिनिकल प्रोटोकॉल का पालन जरूरी : प्रो. अविनाश अग्रवाल
लखनऊ, अमृत विचार : देश में मातृ मृत्यु दर आज भी एक गंभीर चुनौती है। इसका प्रमुख कारण क्लिनिकल प्रोटोकॉल और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के बीच का अंतर है। यह बात किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. अविनाश अग्रवाल ने ऑब्स्टेट्रिक क्रिटिकल केयर विषय पर आयोजित कार्यशाला में कही। उन्होंने कहा कि कई मामलों में समय पर पहचान और उचित उपचार न मिलने से जटिलताएं बढ़ जाती हैं, विशेषकर सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में। ऐसी परिस्थितियों में अर्ली वार्निंग स्कोरिंग सिस्टम बेहद उपयोगी है, जो मरीज की स्थिति बिगड़ने के शुरुआती संकेतों को पहचानकर समय रहते उपचार शुरू करने में मदद करता है।

वहीं, कार्यक्रम में मौजूद प्रो. बीके ओझा, अंजू अग्रवाल, डॉ. सुलेखा सक्सेना और डॉ. शुचि आदि विशेषज्ञों ने गर्भावस्था या प्रसव के दौरान अचानक स्थिति बिगड़ने जैसे ब्लड प्रेशर गिरना या अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति में पॉइंट-ऑफ-केयर अल्ट्रासाउंड (पीओसीयूएस) को एक प्रभावी तकनीक बताया। इसके माध्यम से हृदय, रक्त प्रवाह और शरीर की अन्य स्थितियों का तुरंत आकलन कर शॉक के कारण का पता लगाया जा सकता है, जिससे इलाज अधिक सटीक और समयबद्ध हो पाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार शॉक के प्रबंधन में सही समय पर फ्लूड देना, आवश्यकता अनुसार वेसोप्रेसर का उपयोग और कारण के अनुसार उपचार करना अत्यंत आवश्यक है। इन उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन से मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। प्रो. अविनाश के मुताबिक कार्यशाला में विभिन्न राज्यों से आए 300 से अधिक कंसल्टेंट्स, पीजी छात्र एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया। इसमें मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों के प्रतिनिधियों की भागीदारी रही।
