'बदलेगा पर्यावरण, महसूस होगी अतीत की अयोध्या' ....मियावाकी पद्धति से तैयार होगा 9.62 लाख पौधों को जंगल, ऋषियन वन से शुरू हुई थी बदलाव की मुहिम
राजेंद्र कुमार पांडेय/अयोध्या, अमृत विचार। वैदिक सिटी बन रही अयोध्या का पर्यावरण बदलेगा। श्रद्धालुओं से यहां के लोगों तक को अतीत की अयोध्या अनुभव में आएगी। ऋषियन वन से शुरू हुई बदलाव की मुहिम इस साल भी जारी रहेगी। जिले में 27.5 हेक्टेयर में 9.62 लाख पौधों वाला जंगल मियावाकी पद्धति से तैयार होगा। इसके लिए स्थल चयन किया जा रहा है।
त्रेता युग में अयोध्या वनाच्छादित क्षेत्र था। इसके प्रमाण अब तक मौजूद है। राम नगरी में प्रमोद वन का इलाका है। जिले के मवई ब्लॉक के लखनीपुर गांव के पास और अंबेडकरनगर के श्रवण क्षेत्र में प्रमोद वन के प्रस्तर स्तंभ लगे हैं। राम मंदिर के फैसले के बाद भौतिक विकास के लिए वर्तमान अयोध्या में कई हजार पेड़ काट डाले गए।
कुछ को काटने की मजबूरी थी तो कुछ काटने वालों के स्वार्थ का शिकार हो गए। शहर के लोग इसका खामियाजा भोग रहे हैं। बिना पेड़-पौधों और जंगलों के अयोध्या की मिट्टी भले वही रहे लेकिन सांस्कृतिक अयोध्या नहीं बन पाएगी। अब पेड़ों की भरपाई और शीतलता देने वाली और आंखों को भाने वाली अयोध्या को आधार देने का प्रयास किया जा रहा है।
जिलाधिकारी निखिल टी. फुंडे और मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने पिछले साल ऋषियन वन की स्थापना के साथ इसे शुरू किया था। जिले के 58 स्थानों पर ऋषियन वन के रूप में 11 हेक्टेयर में लगभग साढ़े चार लाख पौधों के जंगल बनाए गए थे। इस साल भी यह अभियान चलेगा। 27.5 हेक्टेयर यानी सभी 11 ब्लॉकों में 2.5-2.5 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मियावाकी पद्धति से लगभग 9.62 लाख पौधों का जंगल तैयार किया जाएगा।
उपायुक्त मनरेगा उपेंद्र कुमार पाठक ने बताया कि स्थल चयन किया जा रहा है। अब तक सभी ब्लॉकों से 60 स्थानों की 22 हेक्टेयर जमीन की सूची प्राप्त हो गई है। स्थल चयन के साथ मियावाकी पद्धति से पौधरोपण के लिए मृदा तैयार किए जाने की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
ब्लॉक वार चिह्नित जमीन
ब्लॉक-ग्राम पंचायतें-क्षेत्रफल(हे.)
अमानीगंज-6-1.6
बीकापुर-5-2.4
हैरिंग्टनगंज-5-1.8
मसौधा-5-.95
मवई-4-1.63
मयाबाजार-8-3.48
मिल्कीपुर-6-1.83
पूराबाजार-6-1.22
रुदौली-5-1.40
सोहावल-5-4.6
तारून-5-.96
कुल योग-60-21.96
यह जंगल देख होगा मन प्रसन्न
-चित्र में यह तारुन के पेड़रा ग्राम पंचायत में रोपा गया ऋषियन वन अभियान का जंगल है। इसे पिछले साल मियावाकी पद्धति से लगाया गया था। इसकी हरियाली आने जाने वालों का मन मोह रही है। ऐसे ही अन्य स्थानों के जंगल भी हैं।
श्री अयोध्या न्यास ने रोपे कई हजार पौधे
-पूर्व सांसद लल्लू सिंह की संस्था श्री अयोध्या न्यास भी पर्यावरण के क्षेत्र में बड़ा काम कर रही है। पंचवटी, हरिशंकरी उपवनों के रूप में चार साल कई हजार पौधे रोपे। संस्था लोहे की जाली लगवा सुरक्षा के लिए गांव के सिपुर्द कर देती है।
एक हेक्टेयर में लगते हैं 35 हजार पौधे
-मियावाकी पद्धति से एक हेक्टेयर में लगभग 35 हजार पौधे लगते हैं। यह सामान्य पौधरोपण से तीन गुना अधिक होते हैं। इसमें झाड़ी, जंगल से आम, नीम, महुआ, जामुन, पीपल, पाकड़ जैसे देशी पौधे होते हैं।
12,24,786 पौधे लगाएगा विकास विभाग
- जिले के लक्ष्य में विकास विभाग का लक्ष्य 12,24,786 पौधे लगाने का लक्ष्य है। इसमें 9,62,500 पौधे मियावाकी पद्धति से लगाए जाएंगे।
शहरी क्षेत्र में भी होगा पौधरोपण
-पौधों के अभाव में देहात की अपेक्षा शहर का तापमान ज्यादा बढ़ता है। राम पथ इसका उदाहरण है। शहर में पौधे रोपे जाएंगे। ऐसा वन विभाग से बताया गया है। बीते साल भी बड़ी जाली के साथ पौधे रोपे गए थे। इसमें काफी संख्या में पौधे बचे हैं।
इस साल प्रत्येक ब्लॉक क्षेत्र के गांवों में 27.5 हेक्टेयर में मियावाकी पद्धति से जंगल तैयार किए जाएंगे। इसके लिए जमीन चिह्नित की जा रही है। इसके बाद पौधरोपण के लिए मृदा तैयार की जाएगी।-कृष्ण कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी।
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