‘एंटी-वुमन अलायंस’ बना इंडी गठबंधन, भाजपा का हमला तेज... 2027 में राजनीतिक नुकसान की दी चेतावनी
जन आक्रोश पदयात्रा में सरकार के दिग्गजों का विपक्ष पर तीखा प्रहार
लखनऊ, अमृत विचार: नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर राजधानी में आयोजित ‘जन आक्रोश पदयात्रा’ के दौरान भाजपा और सहयोगी दलों के नेताओं ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में निकली इस पदयात्रा में उपमुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और सांसदों ने एक स्वर में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर महिला विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाया।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि इंडी एलाइंस अब एंटी-वुमन अलाइंस साबित हो चुका है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण भाजपा की प्राथमिकता रही है और नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि महिलाओं को आरक्षण नहीं मिला, तो 2027 में सपा-कांग्रेस को कोई वोट नहीं मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार महिलाओं को आरक्षण दिलाकर रहेगी और इसके लिए संघर्ष जारी रहेगा।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश की आक्रोशित बहनें सड़कों पर उतरकर सपा और कांग्रेस का बैंड बजा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की “दुरभिसंधि और संकीर्ण मानसिकता” के कारण संसद में महिला आरक्षण का रास्ता रोका गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं अब इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देंगी और आने वाले चुनावों में इसका असर दिखाई देगा। राज्यसभा सांसद अरुण सिंह ने कहा कि संसद में इस विधेयक के विरोध और उसके बाद खुशी मनाना विपक्ष की मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने इसे नारी अधिकारों का अपमान बताते हुए कहा कि देशभर की महिलाएं इसे कभी नहीं भूलेंगी।
पदयात्रा के दौरान हजारों महिलाओं की मौजूदगी ने इस मुद्दे को व्यापक जनसमर्थन का संकेत दिया। हाथों में तख्तियां और नारों के साथ महिलाएं पूरे मार्ग में विपक्ष के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करती नजर आईं। नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिला अधिकारों के समर्थन में जनभावना का सशक्त प्रदर्शन है।
क्या है विवाद की जड़
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान करता है। सत्तापक्ष का आरोप है कि विपक्ष ने संसद में इसे पारित होने से रोकने की कोशिश की, जबकि विपक्ष इस पर प्रक्रिया और अन्य मुद्दों को लेकर सवाल उठाता रहा है। यही कारण है कि यह विधेयक अब राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। सत्तारूढ़ दल इसे महिला सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कदम बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे अधूरा या राजनीतिक रूप से प्रेरित बता रहा है।
2027 चुनाव पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला मतदाता आने वाले चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का बयान इसी रणनीति की ओर संकेत करता है, जिसमें महिला आरक्षण को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया जा रहा है। यदि यह मुद्दा व्यापक जनसमर्थन हासिल करता है, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। खासकर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में, जहां महिला मतदाताओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, यह मुद्दा राजनीतिक समीकरण बदलने की क्षमता रखता है।
झलकियां
• मुख्यमंत्री ने पूरी पदयात्रा पैदल चलकर किया नेतृत्व
• हजारों महिलाओं की भागीदारी, नारों से गूंजी राजधानी
• विपक्ष पर महिला विरोधी राजनीति का आरोप
• 2027 चुनाव को लेकर नेताओं के तीखे बयान
• ‘इंडी एलाइंस’ पर “एंटी-वुमेन एलाइंस” का नया राजनीतिक नारा
• सुबह 7 बजे से ही सीएम आवास पर जुटने लगीं महिलाएं
• तेज धूप के बावजूद बिना थके पूरी पदयात्रा में सहभागिता
• पोस्टर-बैनर और नारों से गूंजता रहा पूरा मार्ग
• प्रदेशभर से आई महिलाओं की रिकॉर्ड भागीदारी
