दिल्ली के स्कूलों हर 45-60 मिनट पर बजेगी 'वॉटर बेल', भीषण गर्मी और हीटवेव के चलते दिल्ली सरकार का फैसला, दिलाई जाएगी पानी पीने की याद

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Published By Anjali Singh
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दिल्ली। बढ़ते तापमान के बीच शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने दिल्ली के स्कूलों को हर 45-60 मिनट पर घंटी बजाकर छात्रों को पानी पीने की याद दिलाने और 'बडी सिस्टम' लागू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि बच्चे एक-दूसरे के स्वास्थ्य पर नजर रख सकें। ये निर्देश मंगलवार को दिल्ली सरकार के स्कूलों, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के लिए जारी ताजा एहतियाती उपायों का हिस्सा हैं। यह कदम भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की उस चेतावनी के बीच उठाया गया है, जिसमें आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजधानी में ऊष्ण लहर और प्रतिकूल मौसम की स्थिति की आशंका जताई गई है। 

डीओई के परिपत्र के अनुसार, 'वॉटर बेल' प्रणाली के तहत स्कूलों को हर 45 से 60 मिनट में घंटी बजानी होगी, ताकि छात्र नियमित रूप से पानी पीकर निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) से बच सकें। परिपत्र में कहा गया है कि खुले में होने वाली सभाओं का समय सीमित किया जाए या उन्हें छायादार अथवा बंद स्थानों पर कम अवधि के लिए आयोजित किया जाए और खुले में कक्षाएं संचालित न की जाएं। इसके तहत छात्रों को पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी साथ लाना अनिवार्य होगा और स्कूलों को कई सुलभ स्थानों पर सुरक्षित एवं ठंडे पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

विभाग ने स्कूलों को बाहरी शारीरिक गतिविधियों से परहेज करने और कक्षा के दौरान तथा सभाओं में संक्षिप्त जागरूकता सत्र आयोजित कर छात्रों को जल सेवन, लू से जुड़ी बीमारियों और बचाव के उपायों के बारे में जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों को 'बडी सिस्टम' लागू करने के लिए भी कहा गया है, जिसके तहत दो दो छात्रों का समूह बनाया जाएगा, और वे दोनों एक-दूसरे के शारीरिक स्वास्थ्य पर नजर रखेंगे। 

परिपत्र के अनुसार, कक्षा शिक्षकों को अभिभावकों के साथ नियमित रूप से आईएमडी का परामर्श और लू तथा ऊष्ण लहर के पूर्वानुमान साझा करने तथा छात्रों को प्रार्थना सभाओं और सूचना पटों के माध्यम से जागरूक करने को कहा गया है। अभिभावकों को बच्चों को हल्के, सांस लेने योग्य सूती कपड़ों में स्कूल भेजने और व्यक्तिगत स्वच्छता, जैसे दैनिक स्नान के महत्व पर जोर देने की सलाह दी गई है। 

डीओई ने कहा कि प्रत्येक स्कूल 'वॉटर बेल' पहल, जागरूकता सत्रों और लू से बचाव संबंधी सामग्री के प्रदर्शन की निगरानी के लिए एक नोडल शिक्षक नियुक्त करेगा। परिपत्र में यह भी कहा गया है कि कक्षाओं, गलियारों और सूचना पटों पर भीषण गर्मी एवं लू से बचाव संबंधी सामग्री प्रमुखता से प्रदर्शित की जाए और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल प्राथमिक उपचार तथा चिकित्सीय सहायता सुनिश्चित की जाए। डीओई ने कहा कि प्रत्येक स्कूल को दो मई तक संबंधित क्षेत्रीय उप शिक्षा निदेशकों को कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करनी होगी। 

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