कैंपस का पहला दिन: अजनबी माहौल से अपनेपन तक का सफर
कैंपस का पहला दिन सचमुच किसी नई दुनिया में कदम रखने जैसा होता है-उत्साह, डर, जिज्ञासा और अनगिनत आशंकाओं से भरा हुआ। इंटरमीडिएट के बाद जब मैंने डिग्री कॉलेज में प्रवेश लिया, तो मन में कई तरह के विचार उमड़-घुमड़ रहे थे। मैं स्वभाव से थोड़ा शर्मीला और संकोची रहा हूं, इसलिए नए माहौल में खुद को ढालना मेरे लिए आसान नहीं था। पहले दिन जब कॉलेज पहुंचा, तो ऐसा लगा जैसे मेरे कदम मेरा साथ नहीं दे रहे हों। सब कुछ आंखों के सामने होते हुए भी धुंधला-सा लग रहा था।
कैंपस के बारे में पहले से सुनी बातें-यूनियनबाजी, गुटबंदी और झगड़े-मन में डर पैदा कर रही थीं। क्लास में जाने का साहस ही नहीं जुटा पा रहा था। तभी मैदान में कुछ सीनियर्स ने रोक लिया और वहीं मेरी ‘क्लास’ लग गई। किसी ने मेरे चश्मे और बालों में तेल देखकर मजाक उड़ाते हुए ‘चम्पू’ कह दिया।
उस क्षण मैं बेहद असहज और छोटा महसूस करने लगा। आत्मसम्मान को ठेस पहुंची और मन भीतर तक आहत हो गया। उस दिन मैं बिना कुछ किए ही घर लौट आया और बिस्तर पर औंधे मुंह लेटकर देर तक रोता रहा। लगा जैसे यह दुनिया मेरे लिए नहीं बनी है। लेकिन अगले ही दिन हालात बदलने लगे।
कुछ पुराने दोस्त घर आए, जिन्होंने उसी कॉलेज में दाखिला लिया था। उनसे खुलकर बात करने पर मन हल्का हुआ और भीतर कहीं हिम्मत जागी। उनके साथ कॉलेज जाना शुरू किया तो सब कुछ धीरे-धीरे आसान लगने लगा। साथ में क्लास करना, लंच शेयर करना और कैंपस में घूमना-इन छोटी-छोटी बातों ने मेरे अंदर आत्मविश्वास भर दिया।
समय के साथ मैंने समझा कि हर नई जगह शुरू में कठिन लगती है, लेकिन धैर्य और सही साथ से सब सरल हो जाता है। कॉलेज की आजादी का अपना अलग ही आनंद है। यहां न सिर्फ पढ़ाई, बल्कि व्यक्तित्व विकास के भी कई अवसर मिलते हैं। मैंने धीरे-धीरे नए लोगों से बातचीत शुरू की, शिक्षकों से जुड़ाव बनाया और गतिविधियों में हिस्सा लेना भी शुरू किया। इससे मेरा आत्मविश्वास और बढ़ा।
आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो एहसास होता है कि वही डरावना पहला दिन मेरे जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ था। अगर दोस्तों का साथ और उनका हौसला न मिलता, तो शायद मैं खुद को कभी इस माहौल में ढाल नहीं पाता। सच तो यह है कि अच्छे दोस्त न सिर्फ मुश्किल समय में सहारा बनते हैं, बल्कि जीवन के सफर को खूबसूरत और यादगार भी बना देते हैं। कॉलेज की यह यात्रा मेरे लिए सिर्फ शिक्षा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, दोस्ती और जीवन को समझने का एक अनमोल अनुभव बन गई।
