ऐसे हुई एयर कंडीशनर की खोज
(AC) का मुख्य कार्य कमरे के तापमान को नियंत्रित करना और वातावरण को आरामदायक बनाना होता है। यह गर्म हवा को बाहर निकालकर ठंडी हवा अंदर पहुंचाता है, जिससे कमरे में ठंडक बनी रहती है। आज के आधुनिक AC सिर्फ ठंडक ही नहीं देते, बल्कि हीटिंग और एयर प्यूरीफिकेशन जैसी सुविधाएं भी प्रदान करते हैं। AC की क्षमता को British Thermal Unit (BTU) में मापा जाता है, जो इसकी कूलिंग क्षमता को दर्शाता है।
एयर कंडीशनर का आविष्कार विलिस हेवलैंड कैरियर ने वर्ष 1902 में किया था। वे कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद Buffalo Forge Company के प्रिंटिंग प्लांट में कार्यरत थे। वहां अधिक गर्मी और नमी के कारण अखबार की छपाई में समस्या आ रही थी, विशेषकर रंगीन स्याही सही ढंग से कागज पर नहीं बैठती थी। इस चुनौती को हल करने के लिए कैरियर ने एक ऐसी मशीन विकसित की, जो तापमान और नमी दोनों को नियंत्रित कर सके। उनका यह आविष्कार सफल रहा और प्रिंटिंग प्रक्रिया में सुधार आया।
2 जनवरी 1906 को कैरियर को उनके इस आविष्कार के लिए अमेरिकी पेटेंट (नंबर 808897) प्राप्त हुआ। शुरुआती AC मशीनें आकार में बहुत बड़ी थीं और केवल उद्योगों में ही उपयोग की जा सकती थीं। बाद में तकनीक के विकास के साथ इन्हें छोटे आकार में बनाया जाने लगा।
साल 1915 में कैरियर ने एयर कंडीशनिंग के क्षेत्र में उत्पादन को बढ़ाने के लिए कंपनी स्थापित की। इसके बाद 1931 में H. H. Schultz और J. Q. Sherman ने विंडो AC का आविष्कार किया, जिसे 1932 में बाजार में उतारा गया। उस समय इसकी कीमत काफी अधिक थी, जिससे यह आम लोगों की पहुंच से दूर था। समय के साथ एयर कंडीशनर तकनीक में निरंतर सुधार हुआ है, और आज यह हमारे दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
वैज्ञानिक बारे में
विलिस हेवलैंड कैरियर का जन्म 26 नवंबर 1876 को Angola, New York में हुआ था। वे बचपन से ही जिज्ञासु और गणित में रुचि रखने वाले थे। उनकी माता ने उन्हें कठिन समस्याओं को सरल तरीकों से समझना सिखाया, जिसका प्रभाव उनके पूरे जीवन पर पड़ा। उन्होंने Cornell University से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। कैरियर का स्वभाव शांत और शोधपरक था। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन वैज्ञानिक कार्यों और आविष्कारों को समर्पित किया। 1950 में उनका निधन हुआ, लेकिन उनके योगदान आज भी दुनिया को ठंडक पहुंचा रहे हैं।
