जनगणना-2027: रसोई तय करेगी कितने घरवार, दो पत्नियां पर गिने जाएंगे दो परिवार

Amrit Vichar Network
Published By Pradeep Kumar
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इस बार बुजुर्गों के मुखिया होने की अनिवार्यता खत्म, परिवार की सहमति होगी जरूरी

बरेली, अमृत विचार। 22 मई से शुरू होने जा रही जनगणना की गाइडलाइन के अनुसार, परिवारों की संख्या का निर्धारण घर में जलने वाले चूल्हों से होगा। एक ही छत के नीचे कई लोग रहते हैं और उनकी रसोई अलग-अलग है, तो उन्हें अलग परिवार माना जाएगा। इसके साथ हर घर को यूनिक नंबर मिलेगा। एक बड़ा बदलाव यह भी है कि किसी व्यक्ति की दो पत्नियां हैं और वे अलग-अलग रहती हैं, तो उन्हें दो परिवार माना जाएगा। इसके उलट, यदि किसी महिला के दो पति हैं, तो एक ही परिवार की श्रेणी में रखा जाएगा।

जिला जनगणना अधिकारी मनोज कुमार का कहना है कि नई गाइडलाइन के अनुसार अब परिवार का मुखिया चुनने केतरीके बदले गए हैं। यह बिल्कुल अनिवार्य नहीं होगा कि घर के सबसे बुजुर्ग पुरुष को ही मुखिया माना जाए। परिवार की सहमति से किसी भी सदस्य, यहां तक कि महिला को भी मुखिया बनाया जा सकता है। जनगणना टीम घर के सदस्यों की ओर से बताए गए नाम को ही मुखिया के तौर पर दर्ज करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि इस बार तकनीकी रूप से जनगणना को सटीक बनाने के लिए ''डिजी डॉट'' मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग किया जाएगा। प्रगणक एप के माध्यम से उस स्थान की भौगोलिक स्थिति को लॉक करेंगे। जनगणना दो चरणों में होगी। 22 मई से 20 जून 2026 तक पहला चरण मुख्य रूप से हाउस लिस्टिंग पर केंद्रित है। इसमें आवास की स्थिति और घरेलू संपत्तियों का ब्यौरा लिया जाएगा। द्वितीय चरण फरवरी 2027 से शुरू होगा। जिसमें व्यक्तिगत जनगणना में बेघर लोगों को भी शामिल किया जाएगा।

गांवों के मजरों को ब्लाक, शहर में अपार्टमेंट तय किए जाएंगे
जिला प्रशासन को भेजी गई गाइड लाइन में कहा गया है कि इस बार की जनगणना तकनीकी रूप से अधिक सटीक होगी। गांवों के मजरों को ब्लाक के रूप में बांटा जा रहा है, वहीं शहर में अपार्टमेंट को यूनिट स्तर पर तय किए जा रहे हैं। लगभग 800 घरों पर एक गणना ब्लाक कटेगा। इसी तरह तीन से चार अपार्टमेंट को एक यूनिट निर्धारित किया गया है।

ऑनलाइन पोर्टल से कर सकते हैं स्वगणना
डिजिटल रूप में होने जा रही जनगणना में आनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वगणना कर सकते हैं। यह प्रक्रिया भी दो चरणों में होगी, जिसमें जाति-आधारित गणना शामिल है। इस डेटा से पता चलेगा कि कहां-किसकी जरूरत है, किसे मदद चाहिए। डेटा इकट्ठा करने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल करते हुए इसमें पूरी आबादी को शामिल किया जाएगा।

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