बहराइच : घर-घर जाकर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटा रही है आशा कार्यकत्री

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Published By Deepak Mishra
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बहराइच। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियाद को मजबूत करने के लिए बहराइच जिले में व्यापक स्तर पर 'विलेज हेल्थ इंडेक्स रजिस्टर' (वीएचआईआर) सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। जिले की करीब 40.51 लाख आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 3794 आशा कार्यकर्ता गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर हर परिवार की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटा रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह सर्वे केवल आंकड़ों का संकलन नहीं है, बल्कि पूरे वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की योजना बनाने, मातृ-शिशु स्वास्थ्य की स्थिति का आकलन करने और जरूरतमंद मरीजों तक समय पर इलाज पहुंचाने का आधार बनता है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीसीपीएम) मो. राशिद ने बताया कि प्रत्येक आशा कार्यकर्ता हर छह माह में अपने कार्यक्षेत्र के परिवारों का पूरा विवरण वीएचआईआर रजिस्टर में दर्ज करती है।

इसके आधार पर 15 से 49 वर्ष तक के योग्य दंपतियों की पहचान कर उन्हें परिवार नियोजन संबंधी जानकारी दी जाती है। साथ ही गर्भवती महिलाओं का समय से पंजीकरण, प्रसव पूर्व चार अनिवार्य जांचें, सुरक्षित प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल सुनिश्चित की जाती है। उन्होंने बताया कि 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों के पूर्ण टीकाकरण, कुपोषित बच्चों की पहचान, कम वजन वाले नवजातों की निगरानी और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष देखरेख भी इसी सर्वे के आधार पर की जाती है।

इसके अतिरिक्त गांवों में संचारी और गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग कर जरूरत पड़ने पर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों के लिए रेफर किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए 156 आशा संगिनियों को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है। ये आशा कार्यकर्ताओं द्वारा भरे गए रजिस्टरों की जांच कर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि किसी भी परिवार, गर्भवती महिला, बच्चे या बुजुर्ग का विवरण छूटने न पाए।

स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि वीएचआईआर सर्वे और ई-कवच पोर्टल की सतत निगरानी के कारण बीते वित्तीय वर्ष में जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। विभागीय आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष 1,40,296 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच कराई गई, जबकि 1,00,952 महिलाओं का सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया गया। इसी अवधि में 1,25,036 बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण भी कराया गया।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं द्वारा भरे जा रहे ऑफलाइन वीएचआईआर रजिस्टर का पूरा डेटा 'ई-कवच' पोर्टल पर ऑनलाइन भी दर्ज किया जा रहा है। इससे स्वास्थ्य विभाग को गांव स्तर से लेकर राज्य स्तर तक रियल-टाइम डेटा उपलब्ध हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि डिजिटल डाटाबेस तैयार होने से अधिकारियों को यह पता लगाने में आसानी होगी कि किस गांव में कितनी गर्भवती महिलाएं हैं, कितने बच्चों का टीकाकरण होना बाकी है, कितने परिवारों को परिवार नियोजन सेवाओं की जरूरत है और किन मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जाना चाहिए।

डॉ. संजय कुमार के अनुसार ई-कवच पोर्टल के माध्यम से योजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और सटीक क्रियान्वयन संभव हो सकेगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और जरूरतमंदों तक समय पर इलाज एवं परामर्श उपलब्ध कराया जा सकेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में चल रहा यह अभियान जिले के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि आशा कार्यकर्ता इसी तरह सक्रिय रूप से काम करती रहीं, तो आने वाले समय में मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर, कुपोषण और गंभीर बीमारियों के मामलों में कमी लाई जा सकेगी। 

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