गाजीपुर हिंसा को लेकर प्रियंका गांधी का योगी सरकार पर हमला: बोलीं- महिलाओं के खिलाफ अत्याचार चरम पर
गाजीपुर/लखनऊः कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में एक युवती की हत्या के मामले को लेकर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए आरोप लगाया कि इस मामले में पहले एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी की गई, फिर पीड़ित परिवार को धमकियां दी गईं और दबंगों द्वारा अराजक माहौल बनाया गया।
प्रियंका गांधी ने कहा कि यह घटना प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों की गंभीर तस्वीर पेश करती है। उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब एक तरह का "अघोषित कानून" बन गया है, जिसमें किसी महिला के साथ अत्याचार होने पर पीड़िता और उसके परिवार को ही प्रताड़ित किया जाता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर की जाने वाली बड़ी-बड़ी बातें सिर्फ दिखावा बनकर रह गई हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भी महिलाओं के साथ अन्याय होता है, तब सरकार का रवैया पीड़िता के पक्ष में क्यों नहीं दिखाई देता। प्रियंका गांधी ने उन्नाव, हाथरस, प्रयागराज और गाजीपुर जैसे मामलों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इन सभी घटनाओं में भाजपा सरकार पीड़ितों के बजाय आरोपियों के साथ खड़ी नजर आई।
उन्होंने कहा कि देश भर की महिलाएं इस स्थिति को देख रही हैं और इससे गहरी चिंता और आक्रोश का माहौल है। कांग्रेस नेता ने मांग की कि गाजीपुर मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवार को सुरक्षा व न्याय सुनिश्चित किया जाए।
गौरतलब है कि इस मामले में कुल 46 नामजद लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें विधायक जयकिशन साहू 'जैकी', वीरेंद्र यादव और SP ज़िला अध्यक्ष गोपाल यादव, सुनील यादव, मनीष यादव, अनिल यादव, पंचू यादव, सत्य यादव और लगभग 200 अज्ञात लोग शामिल हैं। 15 अप्रैल को ज़मानिया-धरम्मरपुर गंगा नदी पुल के पास निशा शर्मा का शव मिलने के बाद, कटारिया गाँव के उनके पिता, सियाराम शर्मा ने हरिओम पांडे और अभिषेक पांडे के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था । पुलिस ने उसी दिन हरिओम पांडे को गिरफ्तार कर लिया।
इसके बाद, समाजवादी पार्टी ने 22 अप्रैल को पीड़ित परिवार से मिलने के लिए 15 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल भेजने की घोषणा की थी। इससे पहले, 21 अप्रैल को सियाराम शर्मा ने पुलिस के सामने एक आवेदन दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि 20 अप्रैल के समाजवादी पार्टी कार्यालय के एक ज्ञापन में झूठे दावे किए गए थे कि उनकी बेटी की हत्या से पहले उसके साथ बलात्कार किया गया था और उसके शव को गंगा में फेंक दिया गया था।
शर्मा ने कहा था कि उस ज्ञापन में लिखी बातें उनकी मृत बेटी के लिए अपमानजनक थीं और परिवार की गरिमा को ठेस पहुँचा रही थीं, जिसके कारण गाँव वालों में रोष पनप रहा था। बाद में, नंदगंज, रामपुर मांझा, सुहवल और कोतवाली पुलिस थानों से भारी संख्या में पुलिस बल बुलाया गया, जबकि गाज़ीपुर के पुलिस अधीक्षक इराज़ राजा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुँचे थे।
