वैश्विक उथल-पुथल से डगमगाते कारोबार पर ''भामाशाह'' चिंतित, चर्चा में जुटे व्यापारियों ने बताईं कारोबारी दिक्कतें
''युद्ध की विभीषिका के बीच बने हालातों से पड़ रहे कारोबारी असर'' पर ''अमृत विचार'' कार्यालय में आयोजित परिचर्चा के भागीदार बने व्यापारी
लखनऊ, अमृत विचार: वैश्विक उथल-पुथल के बीच डगमगाते कारोबार को लेकर रविवार को 'अमृत विचार'' समाचार पत्र कार्यालय में 'युद्ध की विभीषिका के बीच वैश्विक हालातों से कारोबारी असर' विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें शहर के प्रतिष्ठित ट्रेडों के 'भामाशाह' ने कारोबारी दिक्कतों को उठाया और अपने विचार साझा किए।
7.jpg)
कारोबारियों ने कहा कि यह सच है कि सरकार के प्रयास दीर्घकालिक और बेहतर हैं, लेकिन कुछ बिंदुओं पर सरकार को घेरकर आइना दिखाया।
7.jpg)
कारोबारियों ने कहा कि सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व संग्रह कर देने वाले व्यापारी वर्ग से सिर्फ लेने की ही प्रवृत्ति ठीक नहीं देने की ओर भी ध्यान देना होगा। सरकार के साथ हर मसले पर व्यापारी खड़े रहते हैं।
7.jpg)
याद कीजिए कोरोना के दौरान व्यापारियों ने ही लोगों को खाना बनवाकर पहुंचाया था। पानी, राशन, दवा आदि सभी आवश्यक सामग्री जोखिम उठा आमजनों तक पहुंचा रहे थे।
6.jpg)
व्यापारियों की ओर सरकारों को अपना ध्यान केंद्रित करना होगा। सिर्फ बयानबाजी तक नहीं धरातल पर उन्हें चीजें उपलब्ध कराना होगा। नौकरशाही पर अंकुश लगना जरूरी है।
6.jpg)
कारोबारियों की अपेक्षाएं हैं। विकास के ढांचे को आर्थिक मजबूती और गति प्रदान करने में व्यापारी वर्ग की महती भूमिका रहती है।
5.jpg)
कारोबारी वर्ग मानता है कि वह सरकार का मुफ्त का बड़ा टैक्स कलेक्टर है। बावजूद इसके सरकार व्यवसायियों की मांगों पर अन्य मसलों की तरह गंभीर नहीं है।
वैश्विक परिस्थितियों के बीच आत्मनिर्भरता पर जोर
वैश्विक वर्चस्व की प्रतिस्पर्धा के रूप में देखना चाहिए। मेरा मानना है कि इस संघर्ष के पीछे विश्व की महाशक्तियों की सक्रिय भूमिका है, जिससे आर्थिक और सामरिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। अब समय आ गया है कि भारत अपने संसाधनों और क्षमताओं को मजबूत करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाए। मेरा मानना है कि जो देश आर्थिक और रणनीतिक रूप से जितना सक्षम होगा, वही वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत कर पाएगा। इस बीच, केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर भी चर्चाएं जारी है।
हालांकि, मेरा मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में इन नीतियों की आलोचना पूरी तरह उचित नहीं है, क्योंकि भारत अन्य कई देशों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में बना हुआ है। उन्होंने रंगून, म्यामांर समेत कई देशों से आने वाली अरहर, उड़द आदि दालों के आयात पर भी कई अहम जानकारियां दीं। फिलहाल सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की गई है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि वैश्विक बाजार के दबाव के चलते यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहना कठिन हो सकता है। ऐसे में, आत्मनिर्भरता को केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता के रूप में देखा जा रहा है। नीति-निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दीर्घकालिक स्थिरता के लिए देश को अपने उत्पादन, ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्रों में स्वावलंबी बनना ही होगा।
पेट्रोलियम के बाई प्रोडक्ट में 30 फीसद की तेजी
वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को केवल एक युद्ध के रूप में नहीं, बल्कि इससे ऊर्जा क्षेत्र में होने वाला असंतुलन भी है। इससे महंगाई लगातार बढे़गी। रॉ मैटीरियल विदेश से आ रहा है। पेट्रोलियम के बाई प्रोडक्ट में तीस प्रतिशत की तेजी है। इससे चीजों के दाम में बढ़ोत्तरी होना तय है। सरकार कमर्शियल, बिजली, नगर निगम, जीएसटी समेत तकरीबन 19 तरह के टैक्स वसूल रही है। कर देने में दिक्कत नहीं टैक्स संग्रह करने वाले कलेक्टर जो हैं लेकिन व्यापारियों को मिलने वाली सहूलियतें कहां हैं? विदेशों में टैक्स देने के बाद शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त हैं। यहां का कारोबारी कहां पर है। सरकार के साथ कोरोना समेत विभिन्न आपदा के काल में व्यापारी वर्ग सबसे पहले आगे आता है। लेकिन सरकार लेती है उसकी एवज में देने की प्रवृत्ति नहीं है। इस ओर देखना ही होगा। मौजूदा परिस्थितियों में आत्मनिर्भरता ही सबसे बड़ा समाधान है। समाज को अपने संसाधनों का संतुलित उपयोग करते हुए हर परिस्थिति के लिए अपने आपको तैयार करना होगा।
पारंपरिक साधनों की ओर लौटने की अपील
उप्र. आदर्श व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने कहा कि आधुनिक सुविधाओं के बीच समाज अपनी पारंपरिक व्यवस्थाओं को भूलता जा रहा है, जिसका असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। लोगों में बढ़ती आरामतलबी के कारण छोटी-छोटी दिक्कतें भी बड़ी समस्या बनती जा रही हैं। ऐसे समय में जरूरत है कि न केवल खुद में बदलाव लाया जाए, बल्कि नई पीढ़ी को भी आत्मनिर्भर बनने के गुण सिखाए जाएं। वर्तमान में रसोई गैस की किल्लत से लगभग हर परिवार प्रभावित है। इस स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक उपायों पर जोर देना आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ-साथ पारंपरिक चूल्हे और भट्ठियों को भी अपनाया जाना चाहिए, ताकि किसी एक संसाधन पर निर्भरता कम हो सके। उन्होंने बताया कि गैस की कमी के चलते बीते एक माह में बिजली से चलने वाले उपकरणों की बिक्री में लगभग दस गुना वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि लोग तेजी से विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक मूल्यों की ओर लौटने की जरूरत
भारत को अन्य देशों पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि बायोगैस जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत उत्तराखंड सहित कई क्षेत्रों में सफल साबित हो रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय संसाधनों के उपयोग से ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है। इस दिशा में सरकार के प्रयासों के साथ समाज को भी सहयोग करना चाहिए। वर्तमान वैश्विक तनाव और संघर्ष का प्रभाव अन्य देशों की तुलना में भारत पर अपेक्षाकृत कम पड़ा है, लेकिन व्यापार क्षेत्र में चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में उद्योग और व्यापार को मजबूत बनाने के लिए आत्मनिर्भरता आवश्यक है। नई पीढ़ी की जीवनशैली में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है। देर रात तक जागना और दिन में सोने की आदतें दीर्घकालिक रूप से समाज के लिए हानिकारक साबित हो सकती हैं। इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। देश के समग्र विकास के लिए अपनी संस्कृति और परंपराओं की ओर लौटना जरूरी है। आत्मनिर्भरता के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाकर ही मजबूत और संतुलित समाज का निर्माण किया जा सकता है।
व्यापारी हितों और ‘मेक इन इंडिया’को लेकर सरकार से अपेक्षाएं
हर परिस्थिति में व्यापारी वर्ग सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहता है, लेकिन जब उनकी आवश्यकताओं और अधिकारों की बात आती है तो अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि आज व्यापारी अपनी पहचान और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहा है। सरकार को यह समझना होगा कि एक व्यापारी से कई परिवारों की आजीविका जुड़ी होती है और उनके माध्यम से अनेक घरों के चूल्हे जलते हैं। कर व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि व्यापारियों द्वारा दिए जाने वाले टैक्स का सदुपयोग सुनिश्चित होना चाहिए। उनका मानना है कि पारदर्शिता और प्रभावी नीतियों के जरिए ही व्यापारिक वातावरण को मजबूत किया जा सकता है। व्यापारी वर्ग के प्रति अपनी सोच में बदलाव लाया जाए और उनके हितों को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ को वास्तविक रूप में लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, जिससे देश में उत्पादन और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि यदि सरकार और व्यापारी वर्ग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।
महंगाई के दौर में व्यापारियों की सामाजिक जिम्मेदारी भी
व्यापार केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि एक पुश्तैनी परंपरा है, जो समाज से गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्ग समाज को रोजगार और आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराकर महत्वपूर्ण योगदान देता है। हालांकि, महंगाई का प्रभाव हर वर्ग पर पड़ता है, ऐसे में व्यापारियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे अपने कर्मचारियों की जरूरतों और समस्याओं को समझें। उन्होंने कहा व्यापारियों को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। हमें यह समझना होगा कि कर्मचारी हमसे नहीं, बल्कि हम कर्मचारियों से हैं, उन्होंने कहा उनका मानना है कि कर्मचारियों के सहयोग और परिश्रम के बिना किसी भी व्यापार की सफलता संभव नहीं है।उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में व्यापारियों को यह आत्ममंथन करने की आवश्यकता है कि वे समाज को क्या दे रहे हैं और किस प्रकार अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
व्यापार और समाज एक-दूसरे के पूरक हैं, इसलिए संतुलन और सहयोग के साथ ही आर्थिक और सामाजिक विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।
सबसे ज्यादा कारोबार जेनेरेट करता है व्यापारी सुविधाओं तो देनी ही होंगी
युद्ध की विभीषिका के बीच अपने संसाधनों के बल पर भारत हर लक्ष्य को पा रहा है। व्यापारी वर्ग सरकार से ज्यादा रोजगार जेनेरेट करने वाला वर्ग है। इससे पूरे देश में बड़ी संख्या में रोजगार सृजित होता है। न केवल काम करने वाले कर्मचारी बल्कि उनके परिवार को भी संरक्षण देने का काम करता है। ऐसे में सरकारों को चाहिए कि वह उसे मात्र टैक्स कलेक्टर के रूप में न जाने बल्कि व्यापारी वर्ग को देने पर भी सरकार को अब विचार करना होगा। कपड़ों की कीमतों में हर वर्ष तेजी है। यार्न महंगा है। इससे वस्त्र उद्योग प्रभावित है। सेल पर प्रभाव पड़ा है। ऑनलाइन के विरोध में सभी व्यापारी हैं यह न तो पर्याप्त टैक्स सरकार को देता है और न ही उसकी कोई जवाबदेही है। हम लोग सरकार का साथ दे रहे हैं। लेकिन कब तक, निराशा नहीं आनी चाहिए।
गैस से इतर पुराने विकल्पों की ओर होगा लौटना
पहले ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस प्लांट आम थे, जो घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सहायक होते थे। उन्होंने बताया कि उनके गांव में भी पूर्वजों ने बायोगैस प्लांट लगाया था, लेकिन समय के साथ रसोई गैस की उपलब्धता बढ़ने पर यह विकल्प उपेक्षित हो गया और धीरे-धीरे बंद हो गया। आज की परिस्थितियों में फिर से उसी विकल्प की जरूरत महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में गैस के वैकल्पिक साधनों की खोज और उनका उपयोग अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि ऊर्जा संकट से भी राहत मिल सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस दिशा में सरकार के प्रयासों को जनसहयोग की आवश्यकता है।
व्यापारी एकजुट रहें। ताकि उनकी आवाज शासन-प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगी।
‘अमृत विचार’ की सराहना: व्यापारियों की आवाज को मिल रहा मंच
अखबार लगातार व्यापारियों की समस्याओं को प्रमुखता से प्रकाशित कर रहा है। कई मुद्दों का हल हुआ। ‘अमृत विचार’ द्वारा समाज के ज्वलंत मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जा रहा है, जिससे न केवल व्यापारियों बल्कि आम जनमानस की समस्याएं भी सामने आ रही हैं। यह प्रयास समाज और प्रशासन के बीच संवाद स्थापित करने में सहायक साबित हो रहा है। उम्मीद है कि भविष्य में भी अखबार इसी तरह निष्पक्षता और प्रतिबद्धता के साथ जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाता रहेगा, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों को अपनी बात रखने का सशक्त मंच मिलता रहेगा।
सरकार को अफवाहों पर रोक लगाना चाहिए
आज का जो माहौल पूरे विश्व में चल रहा उससे हमारा भारत देश भी प्रभावित हुआ है यहां के हर नागरिक पर इसका प्रभाव पडा है इन परिस्थितियों में भारत के सभी नागरिकों को एक जुट होना चाहिए। आपदा में अवसर तो तलाशना चाहिए, लेकिन आम जनमानस की भलाई के लिए न कि उसका फायदा उठाए जाए। सरकारों को अफवाहों को रोकना चाहिए और आम जनता की परेशानियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। व्यापारी वर्ग हर आपदा में सरकारों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चलता है सरकारों को भी व्यापारियों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
छोटे मामलों में प्रताड़ित न किया जाए
युद्ध का जो माहौल पूरे विश्व में चल रहा उसमें सबसे ज्यादा अगर कोई प्रभावित हुआ वो व्यापारी समाज। चीजें महंगी होती जा रही और आम उपभोक्ता डरता भी और कम खर्च की भी कोशिश कर्ता है जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है। ऐसे समय में सरकार को चाहिए कि व्यापारी को छोटे-छोटे मामलों में प्रताड़ित न किया जाए जिससे कि वो अपना व्यापार आसानी से चला सके और सरकार को टैक्स भी दे सके। व्यापारी सिर्फ अपना परिवार ही नहीं चलाता बल्कि जितने कर्मचारी रखता उनका भी परिवार चलाता है।
युद्ध विराम के बाद लौटेगी स्थिरता
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों मैं उथल-पुथल रही सभी व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है उम्मीद थी कि युद्ध विराम के बाद बाजार में स्थिरता लौटेगी। कच्चे माल की कीमतों में संतुलन आएगा और व्यापारिक गतिविधियां फिर से सामान्य गति पकड़ेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ जिस कारण से प्रोडक्शन बंद हो गए हैं गैस की दिक्कत की वजह से व्यापार पर काफी प्रभाव पड़ा है सभी ट्रेड में मैटेरियल पर 10 से 20 प्रतिशतके रेट बढ़ गए हैं और इस पर लगाम नहीं लगी तो आने वाले समय में महंगाई निश्चित बढ़ेगी।
पैकजिंग मैटेरियल 30 फीसदी तक महंगा
कपड़े हो या कोई अन्य चीज सभी पैकिंग पर निर्भर हैं। पैकिंग मैटीरियल में बीस से तीस प्रतिशत की बढ़ोत्तरी है। वैश्विक उथल-पुथल ने इसे और रफ्तार दे दी है। खास तौर पर कपड़ा कारोबार तो पैकिंग पर ही निर्भर है। क्वालिटी के साथ अगर पैकिंग अच्छी है तो ग्राहक इस ओर तेजी से आकर्षित होता है। बाहर से आज भी कई चीजें आ रही हैं। लोगों को अफवाहों से बचना होगा। लोग गैस संकट से उबर रहे हैं। लोगों को ऐसे नाजुक समय में विकल्प तलाशने ही होंगे। सरकार को व्यापारियों की मांगों पर ध्यान देना होगा।
व्यापारी गतिविधियां फिर से होगी सामान्य
अमेरिका और ईरान युद्ध के कारण गैस की दिक्कतें तो हुई है उसका विकल्प की ढूंढा गया है बायो गैस के रूप में। सभी ट्रेड अपने व्यापार को बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं। व्यापारी गतिविधियां फिर से सामान्य होंगी हमें अपने भारत में बनने वाली चीजों को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए महत्व देना चाहिए। रॉ मटेरियल के रेट बढ़ने से 10 से 20 प्रतिशत सभी वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं इससे व्यापार कम हो गया है यह तेजी महंगाई को बढ़ा रही है।
6.jpg)
