यूपी में प्रीपेड मीटर अनिवार्यता पर विवाद, पावर कॉरपोरेशन के खिलाफ अवमानना याचिका
लखनऊ, अमृत विचार: स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उत्तर प्रदेश में विवाद गहराता जा रहा है। सोमवार को उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में पावर कॉरपोरेशन के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि संशोधित अधिसूचना जारी होने के बावजूद राज्य में अब भी नए बिजली कनेक्शन केवल प्रीपेड मीटर के साथ ही दिए जा रहे हैं, जो केंद्रीय नियमों के विपरीत है।
याचिका के अनुसार, नई अधिसूचना एक अप्रैल-26 को जारी हुई थी, जिसके बाद प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता स्वतः समाप्त हो गई। इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन पुरानी अधिसूचना के आधार पर उपभोक्ताओं को केवल प्रीपेड मीटर ही दे रहा है। इसे केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की अधिसूचना और विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) का उल्लंघन बताया गया है, जिसमें उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का अधिकार दिया गया है।
परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि अधिकारियों की ओर से प्रीपेड मीटर को अनिवार्य बनाना उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन है और इसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन की मनमानी से प्रदेश में असंतोष की स्थिति बनी हुई है। परिषद ने मांग की है कि बिना उपभोक्ता की सहमति के प्रीपेड मोड में बदले गए करीब 75 लाख स्मार्ट मीटरों को फिर से पोस्टपेड किया जाए।
साथ ही, सितंबर-25 के बाद दिए गए सभी नए कनेक्शनों को भी पोस्टपेड विकल्प में बदला जाए। परिषद ने साफ किया कि किसी भी उपभोक्ता पर प्रीपेड मीटर थोपना कानून के खिलाफ है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
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