Moradabad: बंदरों के उत्पात से नागरिकों की जान पर आफत, कई को काटकर किया जख्मी
मुरादाबाद, अमृत विचार। बंदर शहरी आबादी में नागरिकों की जान पर आफत बने हैं। वेव ग्रीन कॉलोनी और आशियाना फेज एक और दो में बंदरों का झुंड उत्पात मचा रहा है। वह लोगों को काटकर जख्मी कर रहे हैं। साथ ही खाने की सामग्री को छीनने के लिए वह झपट्टा मार रहे हैं। जिससे हड़बड़ाहट में लोग गिरकर भी चोटिल हो जा रहे हैं।
पॉश इलाके की कॉलोनी वेव ग्रीन, एमडीए की कॉलोनी आशियाना फेज एक और दो के अलावा रामगंगा विहार, कांठ रोड की अन्य कॉलोनियों में बंदरों का उत्पात जारी है। बंदर झुंड में घरों की बालकनी, छत, दरवाजे, पार्क में पहुंचकर लोगों को जख्मी कर रहे हैं। लोग अपनी सुरक्षा के लिए घरों की बालकनी को जाली से ढक रहे हैं। जिससे बंदरों का झुंड उनके घर में आकर उत्पात न करे। बंदरों का झुंड कॉलोनियों के पार्क में भी सुबह और शाम को पहुंच रहे हैं। उनके घर से बच्चे और बुजुर्ग सार्वजनिक पार्क में जाने से कतरा रहे हैं। इसके अलावा कई बार मुख्य मार्ग भी अचानक बंदर दौड़ लगा देते हैं जिससे वाहन चालक असंतुलित होकर चोटिल हो रहे हैं। वेवग्रीन सोसाइटी में बंदरों के आतंक से लोग सहमे हैं। भूपेंद्र सिंह, ओमप्रकाश अग्रवाल आदि को बंदरों से काटकर जख्मी कर दिया है। जिससे उनके सहित कॉलोनी के अन्य लोग भी भयभीत हैं। वहीं वन विभाग और नगर निगम एक दूसरे पर जिम्मेदारी मढ़ रहे हैं। विभागों की रस्साकसी में लोग बंदरों के उत्पात से जख्मी हो रहे हैं।
अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि प्रमुख सचिव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन के द्वारा स्पष्ट रुप से आदेश जारी किया गया था कि बंदरों के प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी उनके विभाग की है। इसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का भी उल्लेख किया गया है। इसके आधार पर नगर विकास विभाग को इसमें केवल सहयोग प्रदान करना है। बंदरों को पकड़ने का काम वन विभाग का है। नगर निगम इसमें सहयोग करने को हमेशा तैयार है। लेकिन वन विभाग अपनी जिम्मेदारी से कैसे पीछे हट सकता है।
डीएफओ अविनाश पांडेय के मुताबिक बंदरों का झुंड कहीं से शहरी क्षेत्र में आ गया है। पेट भरने के लिए आबादी क्षेत्र में उन्हें रोटी, मूंगफली, चना आदि मिल जाता है। जिसके लालच में बंदर पहुंच रहे हैं। हालांकि अप्रैल 2023 से बंदर वन्यजीव नहीं माना गया है। इस संबंध में शासनादेश भी स्पष्ट है। इसमें वन विभाग का कोई हस्तक्षेप नहीं है।
