लखनऊ : समोसा 10 और मिठाई 100 रुपये तक होगी महंगी, कामर्शियल सिलेंडर के बढ़े दामों ने कारोबारियों में आक्रोश
लखनऊ, अमृत विचार : कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की किल्लत से खाद्य काराेबारी उबर नहीं पाए थे कि शुक्रवार को एक साथ बढ़े 933 रुपये दाम ने कमर तोड़ दी है। इससे खाद्य कारोबारियों में आक्रोश बढ़ गया है। हालांकि बढ़े दामों का असर सीधे ग्राहकों पर पड़ेगा। ऐसी स्थिति में समोसा 10 से सीधे 20 रुपये, खस्ता 20 से 30 रुपये और मिठाई के 100 रुपये तक बढ़े दामों पर दुकानदारों ने बेचने का मन बना लिया है।
बढ़े दामों से ही कॉमर्शियल सिलेंडर की लागत निकालेंगे। जो पहले 19 किग्रा रुपये 2,201 का खरीदते थे अब 3,194 रुपये का खरीदेंगे। होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, मेस में भी 20 से 50 रुपये तक खाने में बढ़ोतरी करने की तैयारी है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के चलते कामर्शियल सिलेंडर की किल्लत से कारोबारी वैसे भी परेशान है और एक माह पहले दाम बढ़ा चुके है। ज्यादातर प्रतिष्ठानों में सिलेंडर न मिलने की वजह से भट्ठियों का उपयोग हो रहा है। इसे जलाने के लिए लकड़ी व कोयला भी महंगा बिक रहा है।
सहालग पर पड़ेगा असर, बढ़ेगा खाने-पीने का खर्च
शादी व अन्य आयोजनों के लिए सिलेंडर की किल्लत वैसे भी ऊपर से कई गुना दाम बढ़ने से इसका असर आयोजनकर्ता पर पड़ेगा। बढ़े दामों पर सिलेंडर खरीदने से कार्यक्रम में खर्च अधिक आएगा। वहीं, कैटरर्स के लिए भी मुश्किल होगा। परेशानी उन्हें होगी जो आगे शादी व अन्य आयोजन के लिए कैटरिंग पहले के दामों के हिसाब से बुक कर चुके हैं। सभी ने बढ़े दामों का विरोध करके वापस लेने की मांग की है।
-वैसे भी कामर्शियल सिलेंडर आसानी से नहीं मिल रहा है। अब कई गुना महंगा खरीदने पर लागत बढ़ जाएगी। मजबूरन समोसा 20, खस्ता 25 रुपये और मिठाई के दाम 100 से 150 तक बढ़ाने पड़ेंगे।- सुरेंद्र गुप्ता, मदन स्वीट
कामर्शियल सिलेंडर की किल्लत होने पर भट्ठी पर खाना बनाने लगे। लकड़ी और कोयला भी महंगा हो गया। बढ़ती लागत के कारण मामूली सा दाम बढ़ाया। अब दाम बढ़ायेंगे तो ग्राहक नहीं आएंगे। इसलिए कामर्शियल सिलेंडर नहीं खरीदेंगे।- अभिनव, संचालक भार्गव रेस्टोरेंट
इतनी बिक्री नहीं है कि कई गुना बढ़े दामों पर कामर्शियल सिलेंडर खरीद सकें। वैसे भी किल्लत है और आसानी से नहीं मिल रहा। भट्ठी ही ठीक है। दाम पहले भी नहीं बढ़ाये न अब बढ़ाएंगे। - रामबाबू, दुकानदार मुरादाबादी बिरयानी
सब्जी, आटा, दाल, चावल आदि महंगी मिलने से मेस में अधिक लागत आती है और उतनी कमाई नहीं है। किसी तरह पहले 2,201 रुपये का सिलेंडर खरीद लेते थे। जो किल्लत के बाद से भट्ठी पर खाना बनाने लगे। इतना महंगा सिलेंडर नहीं लेंगे। भट्टी पर ही खाना बनाएंगे। - करन कश्यप, मेस संचालक
