पनीर के टुकड़े और काला नमक: 'धूमधाम' वाले जन्मदिन का कड़वा सच
मृदुल शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार
गुड़िया अपनी सबसे प्यारी सहेली बेबी के जन्मदिन पर होने वाले उत्सव में सम्मिलित होने का निमंत्रण पाकर बहुत खुश थी। इससे पहले गुड़िया ने इस प्रकार के किसी उत्सव में भाग नहीं लिया था। बेबी का घर गुड़िया के घर से पांच घरों के बाद था। बेबी के जन्मदिन पर गुड़िया नई फ्राक पहनकर और गले में प्लास्टिक के मोतियों की माला पहनकर गई थी। गुड़िया की मम्मी ने उसके बालों में थोड़ा तेल लगाकर दो चोटियां कर दी थीं और फ्राक के रंग से मिलते-जुलते रंग के रिवन से उसके सिर पर सुंदर फूल भी बना दिया था। फिर अपनी सजी-धजी गुड़िया को देखकर उसके मन में यह विचार आया कि कहीं गुड़िया को किसी की बुरी नजर न लग जाए, इसलिए उसने गुड़िया की आंखों में काजल आंज कर उसके माथे पर बाईं ओर एक छोटा सा टीका भी लगा दिया था और फिर गुड़िया का हाथ पकड़कर उसे बेबी के घर तक पहुंचा कर द्वार से ही चुपचाप लौट आई थी। बेबी के घर में उसके साथ पढ़ने वाले पांच-छः बच्चे और आए थे, जिनमें गुड़िया के पड़ोस में रहने वाली उसकी सहेली बबली भी थी। बबली को वहां पाकर गुड़िया बहुत खुश थी।
गुड़िया ने देखा कि बेबी का घर गुड़िया के घर की तुलना में काफी बड़ा है और उसके घर में तरह-तरह के सामान यत्र-तत्र रखे हुए हैं। दरवाजों और खिड़कियों पर चमकदार पर्दे पड़े हुए हैं। केक काटे जाने के बाद गुड़िया ने बबली तथा अन्य बच्चों के साथ “तुम जियो हजारों साल” गीत पर नृत्य भी किया था। फिर पेट भर स्वादिष्ट पकवान और मिष्ठान्न खाकर तथा कोल्ड ड्रिंक पीकर बबली के साथ अपने घर लौटी थी। गुड़िया ने घर आकर अपने मम्मी-पापा से जन्मदिन के उत्सव का विस्तार से वर्णन किया और अपने पापा से पूछा कि उसका जन्मदिन कब होगा? यह सुनकर राम सजीवन बोला -“तुम्हारा जन्मदिन आठ अप्रैल को होगा।” “फिर उस दिन हम भी पार्टी करेंगे और अपनी सहेलियों के साथ अपना जन्मदिन मनाएंगे।”- गुड़िया ने उत्साहित स्वर में कहा।
अपने पापा से जन्मदिन धूमधाम से मनाने का आश्वासन पाकर गुड़िया खुश हो गई। फिर कुछ क्षण मौन रहकर उसने अपने पापा से पूछा कि हमारा घर बेबी के घर जैसा खूब बड़ा क्यों नहीं है, हमारे घर में बेबी के घर की तरह बहुत सारे सामान क्यों नहीं रखे हैं? आदि आदि।
तब राम सजीवन ने उसे बताया कि वह जिस कार्यालय में काम करते हैं, उसमें बेबी के पापा बहुत बड़े अधिकारी हैं। इसीलिए कार्यालय की ओर से उन्हें रहने के लिए कालोनी में बहुत बड़ा मकान मिला है। मैं उस कार्यालय में छोटा कर्मचारी हूं, इसीलिए मुझे रहने के लिए छोटा मकान मिला है। यह सुनकर गुड़िया ने पुनः प्रश्न किया-“आप उनकी तरह बड़े अधिकारी क्यों नहीं हैं? “बेबी के पापा ने खूब पढ़ाई की थी। इसीलिए वह बहुत बड़े अधिकारी बन गए। मैंने कम पढ़ाई की थी, इसलिए मैं बड़ा अधिकारी नहीं बन सका। तुम भी खूब पढ़ाई करना जिससे तुम भी बड़ी अधिकारी बन सको।”- राम सजीवन ने गुड़िया को प्यार से समझाया। इसके बाद तो गुड़िया रोज ही अपने मम्मी-पापा से पूछने लगी कि उसके जन्मदिन के आने में अब कितने दिन शेष हैं।
यह देखकर एक दिन गुड़िया की मम्मी ने राम सजीवन से कहा -“गुड़िया के पापा, अभी तक तो हम पांच रुपये के बताशे लाकर भगवान को अक्षत-रोली का तिलक लगाकर और प्रसाद चढ़ाकर गुड़िया का जन्मदिन मना लेते थे, मगर अब गुड़िया समझदार हो गई है और वह टंडन साहब की बेटी के जन्मदिन पर मनाए गए उत्सव को देख आई है। अब उसका भी जन्मदिन हमें केक-वेक मंगाकर मनाना पड़ेगा।”“अरे, अभी तो काफी दिन हैं उसका जन्मदिन आने में। तब तक हम अपने दैनिक खर्च में कुछ काट-छांट कर जरूरत भर की बचत कर लेंगे।”- राम सजीवन ने लापरवाही से कहा। मगर सीमित आय के कारण वे लोग चाहकर भी कोई बचत नहीं कर सके। इधर अमेरिका तथा इजरायल का ईरान से युद्ध छिड़ जाने के कारण पेट्रोल, डीजल आदि की कीमतों में भारी वृद्धि हो गई, जिससे अन्य वस्तुओं की कीमतें भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ गईं। इससे राम सजीवन और उनके जैसे अल्प वेतनभोगी लोगों को गृहस्थी की गाड़ी खींचना और भी दुष्कर हो गया। पहली अप्रैल को जब राम सजीवन वेतन लेकर घर लौटे तो पति-पत्नी दोनों देर तक गृह खर्च का हिसाब-किताब करते रहे, मगर गुड़िया का जन्मदिन मनाने के लिए वेतन की रकम से पांच सौ रुपए से अधिक नहीं निकाल सके। राम सजीवन बहुत सोच विचार कर और पत्नी से सलाह के बाद सात अप्रैल की शाम को एक सौ रुपए की टाफी खरीद लाए और गुड़िया से कहा -“बेटी, कल यह टाफी का डिब्बा लेकर विद्यालय जाना और अपनी कक्षा के बच्चों को अपने जन्मदिन के उपलक्ष्य में टाफी बांटना।” यह सुनकर गुड़िया बोली -“ क्या हम अपनी सहेलियों को घर नहीं बुलाएंगे?” तभी गुड़िया की मम्मी ने उसे समझाया -“घर पर तो कुछ बच्चे ही आ सकेंगे। मगर विद्यालय में तो कक्षा के सभी बच्चों और अपनी शिक्षिका के साथ तुम अपना जन्मदिन मना सकोगी। फिर शाम को हम लोग घर में केक काटकर तुम्हारा जन्मदिन मनाएंगे।” अगले दिन गुड़िया ने अपनी कक्षा में सभी बच्चों में टाफी बांटकर अपना जन्मदिन मनाया।
शाम को राम सजीवन कार्यालय से लौटते समय एक छोटा-सा केक और एक पाव पनीर लेते हुए आए। केक देखकर गुड़िया बहुत खुश थी। गुड़िया की मम्मी ने उसे एक अच्छी सी फ्राक पहनाकर तैयार किया। फिर उससे केक कटवाकर जन्मदिन मनाया। गुड़िया की मम्मी ने रसोई में जाकर चाय बनाने के लिए एक बर्तन में पानी चढ़ा दिया और पनीर की सब्जी बनाने की तैयारी करने लगी। तभी अचानक गैस का चूल्हा बुझ गया। उन्होंने गैस के सिलिंडर को बहुत हिलाया-डुलाया, मगर गैस तो खत्म हो चुकी थी। उन्होंने रसोई से निकलकर राम सजीवन को बताया कि गैस खत्म हो गई है। यह सुनकर राम सजीवन का मुंह उतर गया। वह बोले-“ गैस की तो इस समय बहुत किल्लत चल रही है।” “फिर? गैस का प्रबंध तो करना ही पड़ेगा।”- गुड़िया की मम्मी ने ठंडे स्वर में कहा। “बुकिंग की तिथि से दस-बारह दिन के बाद गैस मिल पाती है। ब्लैक में तीन-साढ़े तीन हजार रुपये देने पर सिलिंडर मिल रहा है। इतनी
रकम कहां से दें पाएंगे?”- राम सजीवन ने दीर्घ नि: श्वास छोड़ते हुए कहा। गहरी उदासी को चीरते हुए गुड़िया की मम्मी ने पनीर के छोटे- छोटे टुकड़े किए और उन पर काला नमक छिड़ककर गुड़िया को खिलाकर सुला दिया। राम सजीवन ने एक गहरी सांस लेकर कहा -“यह तो अच्छा हुआ कि आज गुड़िया की सहेलियों को घर पर नहीं बुलाया था वरना पूरी कॉलोनी में लोग हमारा मजाक उड़ाते।” फिर वे दोनों ट्रंप, नेतन्याहू और खामनेई को युद्ध छेड़कर सारी दुनिया को कठिनाई में डालने के लिए कोसते हुए आने वाले कल की चिंता में डूब गए।
