West Bengal Election Result 2026: बंगाल का सियासी सिंहासन... आज किसके सिर सजेगा ताज?
West Bengal Election Result 2026: पश्चिम बंगाल में आज सोमवार को विधानसभा चुनाव के मतगणना चल रही है। इन नतीजों के साथ तय हो जाएगा कि सत्ता का कमान किसके हाथ में जाएगा। ममता बनर्जी अपनी सरकार बचाने में सफल होंगी या बंगाल में नया सियासी अध्याय शुरू होगा? नतीजों से पहले बंगाल की राजनीतिक यात्रा को समझना जरूरी है, क्योंकि यहां सत्ता का गेंद बार-बार हाथ बदला है।
स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस का दबदबा
आजादी के बाद के शुरुआती दशकों में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की मजबूत पकड़ थी। 1952 के पहले विधानसभा चुनाव से लेकर 1977 तक कांग्रेस ने यहां सरकार चलाई। हालांकि इस दौरान कई बार राजनीतिक अस्थिरता देखी गई और सरकारें छोटे-छोटे कार्यकाल वाली रहीं। फिर भी कांग्रेस लंबे समय तक राज्य की सियासत पर हावी रही।
वाम मोर्चे का 34 साल का लंबा राज
1977 में बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आया। सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा सत्ता में आ गया। ज्योति बसु के बाद बुद्धदेव भट्टाचार्य की अगुवाई में यह गठबंधन लगातार 34 साल तक सरकार चलाता रहा। यह न सिर्फ बंगाल बल्कि पूरे देश में किसी भी राज्य में सबसे लंबे निर्वाचित शासन का रिकॉर्ड है।
ममता का तूफान और लेफ्ट का पतन
2011 में एक बार फिर इतिहास रचा गया। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने वाम मोर्चे के लंबे किले को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। ममता की leadership में TMC ने सत्ता संभाली और तब से लेकर अब तक लगातार बंगाल पर राज कर रही है।
BJP का उभार और त्रिकोणीय मुकाबला
पिछले कुछ वर्षों में भाजपा ने बंगाल में अपनी जड़ें तेजी से मजबूत की हैं। मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरकर उसने राज्य की सियासत को और रोचक बना दिया है। अब मुकाबला त्रिकोणीय हो चुका है।
बंगाल में शासन का पूरा इतिहास (पार्टीवार)
पार्टी शासनकाल
कांग्रेस 1952–1977 (बीच में अस्थिरता)
वाम मोर्चा (CPI(M) नेतृत्व) 1977–2011 (34 वर्ष)
तृणमूल कांग्रेस (TMC) 2011–वर्तमान
आज के नतीजे तय करेंगे कि बंगाल की सत्ता पर किसका कब्जा रहेगा। क्या ममता का सफर जारी रहेगा या कोई नया चेहरा सत्ता के सिंहासन पर बैठेगा? पूरा बंगाल इस फैसले का इंतजार कर रहा है।
