World Asthma Day : वायु प्रदूषण से बढ़ रहा अस्थमा का खतरा, आधे मरीजों का ही हो पाता सही इलाज
- विशेषज्ञों ने कहा जागरूकता, नियमित उपचार और इनहेलर का सही उपयोग ही बचाव की कुंजी
लखनऊ, अमृत विचार : भारत में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण अस्थमा के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन केवल लगभग 50 प्रतिशत मरीजों का ही सही उपचार हो पाता है। समय पर इलाज और सही देखभाल से अस्थमा के मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। ये जानकारी किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश ने विश्व अस्थमा दिवस पर सोमवार को साझा की।प्रो. वेद ने बताया कि अस्थमा विश्व और भारत दोनों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन चुका है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2024 रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में लगभग 26.2 करोड़ लोग अस्थमा से प्रभावित हैं और हर वर्ष करीब 4.55 लाख लोगों की मौत होती है। उन्होंने बताया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अस्थमा अधिक पाया जाता है, जबकि बच्चों में यह बीमारी अधिक तेजी से फैल रही है। अनुमान है कि दुनियाभर में करीब 14 प्रतिशत बच्चे इससे प्रभावित हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और दैनिक जीवन पर भी असर पड़ता है।
प्रो. आरएएस कुशवाहा ने बताया कि अस्थमा एक श्वसन रोग है, जिसमें वायुमार्ग प्रभावित होते हैं और सांस लेने में दिक्कत होती है। इसके प्रमुख लक्षणों में घरघराहट, खांसी, सीने में जकड़न और सांस फूलना शामिल हैं। उन्होंने बताया कि दुनिया की 30 से 40 प्रतिशत आबादी किसी न किसी एलर्जी से प्रभावित है, जो अस्थमा का प्रमुख कारण बनती है। उन्होंने कहा एलर्जिक राइनाइटिस वयस्कों में 10 से 30 प्रतिशत तथा बच्चों में 40 प्रतिशत तक को प्रभावित करता है। खाद्य एलर्जी विश्व स्तर पर 6-8 प्रतिशत बच्चों और 2-4 प्रतिशत वयस्कों में पाई जाती है।
प्रो. राजेश कुमार ने कहा कि वैश्विक अस्थमा मामलों के लगभग 13 प्रतिशत भारत में हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा बोझ पड़ता है। भारत में करीब 3.4 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं और वैश्विक अस्थमा से होने वाली मौतों में 46 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत की है, जो समय पर निदान और उपचार की कमी को दर्शाती है।
विशेषज्ञों ने कहा कि अस्थमा प्रबंधन पर 2021 में वैश्विक स्तर पर लगभग 68,300 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि वायु प्रदूषण इस समस्या का प्रमुख कारण है और इससे निपटने के लिए जागरूकता, नियमित उपचार और इनहेलर का सही उपयोग बेहद जरूरी है।इस मौके पर डॉ. सचिन कुमार, डॉ. मो आरिफ, डॉ. अनुराग, डॉ. ऋचा, डॉ. यश, डॉ. दीपक, डॉ. शुभ्रा आदि ने भी अस्थमा के प्रति लोगों को जागरूक करने और समय पर इलाज कराने की अपील की।
लक्षण
-सांस लेने में तकलीफ
-घुटन महसूस होना
-सीने में जकड़न या दर्द
-लगातार खांसी, खासकर रात या सुबह के समय
-सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज
-जल्दी थकान महसूस होना
बचाव
-धूल, धुआं और प्रदूषण से बचें
-नियमित रूप से डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं लें
-पालतू जानवरों के बाल, परागकण से दूरी बनाए रखें
-घर को साफ और हवादार रखें
-मौसम बदलने पर विशेष सावधानी बरतें।
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