संपादकीय:चेतावनी से आगे

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Published By Monis Khan
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भारत में मोबाइल पर तेज़ बीप के साथ आने वाले सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट की शुरुआत आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण छलांग है। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी एनडीएमए और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स सी डॉट द्वारा विकसित ‘सचेत’ प्रणाली, कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल पर आधारित है और देश के सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में सक्रिय की जा चुकी है। यह तकनीकी उन्नति के साथ ‘जीवन बचाने’ की क्षमता से जुड़ा बड़ा बदलाव है।

 सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम यानी सीबीएस पहले के सामान्य एसएमएस प्रणाली से इसलिए बेहतर है, क्योंकि नंबर-टू-नंबर भेजे जाने वाले एसएमएस से देरी हो सकती है,  जबकि सीबीएस किसी क्षेत्र के सभी मोबाइल टॉवरों से एक साथ संदेश प्रसारित करेगा, जिससे आपातकाल में यह रियल-टाइम और अधिक विश्वसनीय माध्यम बन जाएगा तथा बाढ़, चक्रवात, भूकंप या युद्ध जैसी परिस्थितियों में पल भर में  लाखों लोगों तक चेतावनी पहुंच जाएगी। 

वैश्विक संदर्भ में देखें, तो भारत इस क्षेत्र में अग्रणी देशों की श्रेणी में थोड़ी देर से ही सही तेजी से शामिल हो रहा है। अमेरिका में फेडरल इमरजेंसी मैंनेजमेंट एजेंसी के तहत ईएएस, ड्ब्ल्यूईए और आईपीडब्ल्यूएस जैसी बहुस्तरीय चेतावनी प्रणालियां वर्षों से सक्रिय हैं। जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप के कई देशों ने भी भूकंप और आपदाओं के लिए उन्नत अलर्ट सिस्टम विकसित किए हैं। भारत में भी बहुविधि प्रणाली विकसित हो रही है— जैसे मौसम विभाग के अलर्ट, सायरन सिस्टम, टीवी-रेडियो ब्रेकिंग अलर्ट और मोबाइल ऐप्स— परंतु इन सबका एकीकृत और समन्वित उपयोग अभी भी प्रगतिशील ही है। ‘सचेत’ इस दिशा में एक केंद्रीय प्लेटफॉर्म बनने की क्षमता रखता है। 

फिलहाल हमारी बड़ी उपलब्धि है कि हमने विशाल जनसंख्या के अनुरूप 19 से अधिक भाषाओं में इसे तेजी से लागू किया है। इस सीबीएस प्रणाली को अभी से ‘फूलप्रूफ’ कहना जल्दबाज़ी होगी, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं है या सिग्नल कमजोर हैं, वहां यह प्रणाली सीमित हो जाती है। यदि फोन स्विच ऑफ है, बैटरी खत्म है या उपयोगकर्ता ने सीबीएस फीचर बंद कर रखा है, तो अलर्ट नहीं पहुंच पाएगा।

 भारत के दूरदराज़ क्षेत्रों में बिजली और नेटवर्क की अनियमितता इस प्रणाली की प्रभावशीलता पर असर डाल सकती है, इसलिए तकनीक के साथ-साथ बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण भी अनिवार्य है। एक मूल प्रश्न यह भी बना रहता है— क्या केवल चेतावनी देना ही पर्याप्त है? उत्तर स्पष्ट रूप से ‘नहीं’ है। आपदा प्रबंधन तीन चरणों पर आधारित होता है— पूर्व तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया और पुनर्वास। यदि चेतावनी मिलने के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने, राहत सामग्री उपलब्ध कराने और पुनर्निर्माण की व्यवस्था नहीं है, तो तकनीक का लाभ सीमित रह जाएगा। 
देश ने इधर आपदा प्रबंधन में वैश्विक स्तर पर अपनी साख मजबूत की है—चक्रवात प्रबंधन और समय पर निकासी इसके उदाहरण हैं। परंतु जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे के बीच चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट प्रणाली बेहतर पहल है, अंतिम समाधान नहीं। यह तकनीक तब ही प्रभावी होगी, जब इसे मजबूत बुनियादी ढांचे, जन-जागरूकता और समन्वित आपदा प्रबंधन रणनीति के साथ जोड़ा जाए। इसके बाद ही यह चेतावनी प्रणाली वास्तव में जीवन बचाने का माध्यम बन सकेगी।