Moradabad:धूल और धुएं से घुट रहीं सांसें, बढ़ रही रोगियों की संख्या

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Published By Monis Khan
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मुरादाबाद, अमृत विचार। शहर की हवा में धूल, धुआं व अनियंत्रित प्रदूषण से दमा के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में सांस लेने में तकलीफ वाले मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार निर्माण स्थलों की उड़ती धूल, सड़कों पर बढ़ता ट्रैफिक व जेनरेटर से निकलने वाला धुआं हवा को जहरीला बना रहा है। बदलते मौसम ने स्थिति और गंभीर कर दिया है, जिसका बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर पड़ रहा है। प्रदूषण व बदलता मौसम सांस रोगियों में अटैक के प्रमुख कारण बन रहे हैं।

सरकारी अस्पतालों में संचालित नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) क्लीनिकों पर ही नजर डालें तो वर्ष 2025-26 में 200 से अधिक तो क्रानिक आब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के नए मामले ही सामने आए। अस्थमा व अन्य सांस रोगियों की संख्या इससे कई गुना अधिक ही है। चेस्ट फिजिशियन डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय के अनुसार सबसे बड़ा कारण हवा में बढ़ता प्रदूषण है जिसमें धूल के महीन कण शामिल हैं। ये कण सीधे फेफड़ों तक पहुंचकर सूजन व एलर्जी पैदा करते हैं। निर्माण स्थलों से उड़ती धूल, ट्रैफिक से निकलने वाला धुआं व डीजल जेनरेटर का उत्सर्जन हवा को लगातार खराब कर रहा है। मौसम में तेजी से बदलाव भी दमा अटैक को ट्रिगर कर रहा है। गर्मी, नमी व ठंडी हवा के अचानक बदलाव से सांस नलिकाएं संवेदनशील हो जाती हैं। घरों के अंदर भी धूल, पालतू जानवरों के बाल, रसोई का धुआं और धूम्रपान स्थिति को और खराब करते हैं।
यह भी रखें ध्यान

- ज्यादा ट्रैफिक वाले रास्तों पर सुबह-शाम की सैर से बचें।

- घर से बाहर जाएं तो मास्क का इस्तेमाल करें।

- घर में नियमित सफाई व वेंटीलेशन रखें।

- कमरे में नमी संतुलित रखें, बहुत सूखी हवा से बचें।

- घर में एयर प्यूरीफायर या इनडोर पौधों (जैसे स्नेक प्लांट, मनी प्लांट) का उपयोग करें।

- बाहर से आने के बाद चेहरे और नाक को साफ पानी से धोएं।

- परफ्यूम, अगरबती व केमिकल स्प्रे का सीमित इस्तेमाल करें।

- विस्तर की चादर, तकिया कवर और परदे नियमित रूप से धोएं।

- सर्द-गर्म चीजों का अचानक सेवन करने से बचें।

- सांस की एक्सरसाइज (प्राणायाम) को दिनचर्या में शामिल करें।

- पालतू जानवरों को बेडरूम से दूर रखें।

 

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