अधिकारियों को गृह जिले में नहीं मिलेगी तैनाती, मुख्य सचिव ने नई तबादला नीति को लेकर जारी किया शासनादेश
राज्य ब्यूरो/लखनऊ, अमृत विचार। मुख्य सचिव ने एसपी गोयल ने मंगलवार को नई तबादला नीति 2026-27 लागू करने का शासनादेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनाती नहीं दी जाएगी। साथ ही, मंडल स्तर के पदों पर कार्यरत अधिकारियों को उनके गृह मंडल में भी तैनाती से वंचित रखा जाएगा। 3 साल जिला और 7 साल मंडल में सेवा पूरी कर चुके अधिकारियों का स्थानांतरण अनिवार्य होगा।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से स्थानीय प्रभाव, दबाव और पक्षपात की संभावनाएं कम होंगी तथा प्रशासनिक निर्णय अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनेंगे। यह प्रावधान लंबे समय से एक ही क्षेत्र में जमे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी प्रभाव डालेगा और सिस्टम में जवाबदेही बढ़ाएगा। इस प्रक्रिया में सबसे अधिक समय से तैनात अधिकारियों के तबादले को प्राथमिकता दी जाएगी।
शासनादेश में तबादलों में मनमानी पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट प्रतिशत सीमा तय की है। समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकतम 20 प्रतिशत तथा समूह ‘ग’ और ‘घ’ के 10 प्रतिशत तक ही तबादले किए जा सकेंगे। इससे अधिक तबादलों के लिए उच्च स्तर की अनुमति आवश्यक होगी।
इसके साथ ही, पूरी प्रक्रिया को मेरिट आधारित और ऑनलाइन बनाने पर जोर दिया गया है। मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से ही तबादला आदेश, कार्यमुक्ति और कार्यभार ग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। 31 मई 2026 तक सभी तबादले पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।
सख्ती के साथ राहत भी, नीति में संतुलन
नई तबादला नीति में जहां एक ओर सख्ती बढ़ाई गई है, वहीं मानवीय पहलुओं का भी ध्यान रखा गया है। दिव्यांग कर्मचारियों और उनके आश्रितों को सामान्य तबादलों से छूट दी गई है। पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में होने पर उन्हें एक ही स्थान पर तैनाती देने को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, आकांक्षी जिलों में सभी पदों को भरने के निर्देश दिए गए हैं और वहां तैनात कर्मचारियों को न्यूनतम दो वर्ष बाद ही स्थानांतरण का विकल्प मिलेगा।
इनसेट
ऑनलाइन ट्रांसफर सिस्टम को बढ़ावा
• मेरिट आधारित ऑनलाइन ट्रांसफर सिस्टम लागू होगा
• मानव संपदा पोर्टल पर ही कार्यमुक्ति और जॉइनिंग अनिवार्य
• ऑफलाइन आदेश भी पोर्टल पर अपलोड करना जरूरी
• आकांक्षी जिलों और विकासखंडों में सभी पद हर हाल में भरे जाएं
• आकांक्षी जिलों और विकासखंडों में 2 वर्ष बाद विकल्प देकर स्थानांतरण
आदेश न मानने पर कार्रवाई
• तय समय में कार्यभार न छोड़ना अनुशासनहीनता माना जाएगा
• वेतन रोकने और विभागीय कार्रवाई का प्रावधान
• सिफारिश या दबाव डालने पर भी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
