UP: बाढ़ से बर्बाद हो रहे गांव, बचाव के नाम पर सिर्फ भ्रष्टाचार
पीलीभीत, अमृत विचार। एक तरफ संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासनिक तैयारियों के बीच किए जा रहे दावे और दूसरी तरफ विभिन्न गांवों से पहुंचे ग्रामीणों ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए डीएम कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की। पीलीभीत को बाढ़ प्रभावित जिलों की सूची में शामिल कराने और बाढ़ राहत बचाव कार्य के नाम पर सरकारी धनराशि का बंदरबांट करने का आरोप लगाते हुए स्थायी इंतजाम कराने की मांग की गई है। राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर को सौंपा गया।
कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार की अगुवाई में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए। वह जुलूस के रूप में नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। फिर डीएम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इसकी सूचना मिलने पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट को अपनी मांगों से जुड़े ज्ञापन सौंपे गए। इसमें बताया कि उत्तर प्रदेश स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के फ्लड मॉक एक्सरसाइज रिपोर्ट 2025 में राज्य की बाढ़ संबंधी तैयारी और तत्संबंधी राहत कार्यों का विस्तृत विर्णन शामिल है।
मगर, इस रिपोर्ट में प्रदेश के बाढ़ प्रभावित 44 जिलों में पीलीभीत का नाम ही शामिल नहीं है। इस रिपोर्ट में गोमती रिवर बेसिक के पीलीभीत में होने का उल्लेख है। शारदा, घाघरा नदी के पीलीभीत से गुजरने का जिक्र है। मगर देवहा नदी जोकि उत्तराखंड में नंदा और शाहजहांपुर में गर्रा के नाम से जानी जाती है। वह तीनों ही नामों का कोई जिक्र तक नहीं है। जबकि शहर, बीसलपुर, समेत पांच ब्लॉकों में देवहा नदी के उफान पर आने के बाद बाए़ का कहर गांवों को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने मांग की है कि पीलीभीत का नाम बाढ़ प्रभावित संवेदनशील जिलों की सूची में शामिल कराया जाए, ताकि बाढ़ से बचाव के बेहतर इंतजाम कराए जा सकें।
बाढ़ से प्रभावित इलाकों का पुन: सर्वे कराने की भी मांग की। इस मौके पर हरपाल सिंह गंगवार, अर्जुन गंगवार, हरवंश गंगवार, अनुज श्रीवास्तव, मनोहरलाल, इतवारीलाल, राज गंगवार, योगेंद्र, रमेश कुमार आदि विभिन्न गांवों के ग्रामीण मौजूद रहे। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निवर्तमान महासचिव कुमुद गंगवार ने बताया कि इस संबंध में 23 अप्रैल को हमारे स्तर से जिले के सांसद, चारों विधायकों को पत्र लिखा गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। फिर गांव-गांव जाकर ग्रामीणों से संपर्क किया और अब ज्ञापन देने के लिए आना पड़ा है। मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो पंद्रह दिन बाद अनशन किया जाएगा।
बोले- लकड़ी के डंडे, मिट्टी के बोरे से नहीं रुकने वाला बाढ़-कटान
इस दौरान डीएम को संबोधित एक प्रार्थना पत्र भी सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा गया। जिसमें कहा कि जिले में देवहा नदी में प्रतिवर्ष भीषण बाए़ आती है। जिससे कई दर्जन गांव पर असर पड़ता है। आबादी व मकान की कटान की स्थिति में आ जाते हैं।बाढ़ से बचाव के नाम पर प्रशासन द्वारा प्रतिवर्ष कच्ची ठोकरें लकड़ी के डंडे, मिट्टी के बारे लगाए जाते हैं। उनका कहना है कि इससे सिर्फ भ्रष्टाचार होता है, बाढ़ नहीं रुकती। यह मांग की गई कि बाढ़ से नुकसान रोकने के लिए ठोकरें, लोहे की जाली, पत्थरों से बनाई जाए। उनका कहना है कि अगर हर साल थोड़ा-थोड़ा प्रयास भी किया जाए तो पांच साल के भीतर दर्जनों गांवों को बचाने के लिए स्थायी इंतजाम किया जा सकता है।
