नेपाल में अब वर्चस्व कायम करने की होड़
नेपाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही दुनिया के दो बड़े देशों की नजर वहां के दुर्लभ खनिज संपदा पर है। नई सरकार से भारत भी अपने रिश्ते सुधारने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।
नेपाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही दुनिया के दो बड़े देशों की नजर वहां के दुर्लभ खनिज संपदा पर है। नई सरकार से भारत भी अपने रिश्ते सुधारने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। भारतीय रणनीतिकार भी चाहते हैं कि वहां के खनिज पदार्थों खासकर यूरेनियम की खोज का मौका मिले। अमेरिका और चीन भी प्रधानमंत्री बालेन शाह से नजदीकी बढ़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। ये दोनों महाशक्तियां वहां भारत के प्रभाव को कम करने पर भी काम कर रही हैं। सत्ता में आते ही प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कुछ ऐसे फैसले लिए हैं, जो उनके भारत विरोध में उठाए गए कदम को दर्शाते हैं, हालांकि अमेरिका वहां भारत के साथ ही चीन के प्रभाव को भी कम करने पर काम कर रहा है।
नेपाल में तांबा, लोहा, अबरख, मैग्नीशियम, सोना, यूरेनियम प्रचुर मात्रा में हैं। मैग्नीशियम और यूरेनियम के खनन को लेकर इस वक्त जोर आजमाइश हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले दिनों अपने विशेष दूत सर्गियो गोर को नेपाल भेजा था, हालांकि उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री से नहीं हो पाई। सर्गियो गोर ने मंत्रियों और अधिकारियों से मुलाकात कर डोनाल्ड ट्रंप के संदेश को वहां तक पहुंचाया और कई ऑफर भी दिए। उनका मकसद चीन और भारत के प्रभाव को कम करना था, हालांकि इसमें उन्हें बहुत सफलता नहीं मिली है।
भारत और नेपाल का रिश्ता रोटी और बेटी वाला है। ऐसे में नेपाल सरकार जो भी निर्णय लेती है, उसे जनभावनाओं का ख्याल रखना पड़ता है, लेकिन कुछ ऐसे फैसले हुए हैं, जो दोनों देशों के हित में नहीं रहे। इससे पहले केपी ओली की सरकार भारत विरोधी कदम उठाती रही है। चीन का प्रभाव वहां तब बढ़ गया था। केपी ओली सरकार के फैसलों में चीन की छाप स्पष्ट दिखाई देती थी, हालांकि इसका खामियाजा चुनाव में ओली को भुगतना पड़ा।
नई सरकार के गठन के बाद लगा था कि भारत और नेपाल के रिश्ते पटरी पर आएंगे, लेकिन हाल ही में नई सरकार ने कुछ ऐसे कदम उठाए, जो हमारे हितों के लिए उचित नहीं हैं। ये न सिर्फ नेपाल के लोगों के लिए दुखदायी बने, बल्कि भारत के लोग भी परेशान दिखे। प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार ने भारत से आने वाले 100 नेपाली रुपये से ज्यादा कीमत के सामान पर अनिवार्य कस्टम ड्यूटी लगाकर बड़ा झटका दिया, जबकि अभी तक भारत-नेपाल बॉर्डर दुनिया के सबसे खुले अंतर्राष्ट्रीय बॉर्डरों में से एक रहा है, जहां दोनों देशों के लोग बेरोक-टोक आते जाते रहे हैं।
इसके साथ ही भारत और चीन के बीच हुए समझौते के तहत उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथुला दर्रे से यात्रा शुरू होनी है। नेपाल बार-बार कहता है कि महाकाली नदी के पूरब में लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी 1816 की सुगौली संधि के बाद से नेपाल का हिस्सा है। भारत- चीन के इस समझौते से नेपाल भारत से नाराज है। इसका लाभ भी अमेरिका उठाकर वहां खनिजों के खनन में निवेश करना चाहता है, इसलिए वह समान रूप से भारत और चीन के विरुद्ध है। नेपाल के मुस्तांग क्षेत्र में यूरेनियम के साथ ही दुर्लभ पृथ्वी खनिजों का विशाल भंडार है। अमेरिका चाहता है कि इस खनिज को निकालने का ठेका उसे मिले, ताकि वह अपना प्रभाव जमाना शुरू करे, जबकि चीन चाहता है कि यूरेनियम व अन्य खनिजों को निकालने का ठेका किसी तरह से उसे मिल जाए।
मुस्तांग क्षेत्र नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित है। चीन पूरी दुनिया में बड़े पैमाने पर दुर्लभ खनिजों का निर्यात करता है। इसे वह अपने हितों के लिए कई बार दूसरे देशों को झुकाने के हथियार के रूप में भी करता है, इसलिए वह किसी भी स्थिति में वहां ठेका प्राप्त करने को आतुर दिख रहा है, जबकि भारत राजनयिक तरीके से इस कोशिश में लगा है कि उसे वहां ठेका मिले और नेपाल से उसके रिश्ते समृद्ध हों। खनिजों के ठेकों को लेकर महाशक्तियों द्वारा बनाए जा रहे दबाव से नेपाल के सत्ता प्रतिष्ठान में बैठे लोगों के साथ ही वहां के अन्य राजनीतिक दल भी परेशान हैं।
वहां पैठ मजबूत रहे इसलिए ही चीनी थिंकटैंक ने काठमांडू रिंग रोड के विस्तार के लिए 11 अरब नेपाली रुपये अनुदान के रूप में देने की घोषणा की है, तो अमेरिका ने नेपाल की सेना को छह लड़ाकू हेलीकॉप्टर देने का प्रस्ताव रखा है, हालांकि नेपाली आर्मी ने इस प्रस्ताव पर कोई फैसला नहीं लिया है। चीन का नेपाल में बढ़ता प्रभाव भारत के लिए अच्छा संकेत नहीं है, तो अमेरिका का नेपाल में दखल भी किसी तरीके से भारत के लिए शुभ संकेत नहीं है, इसलिए भारत सरकार की ओर से नेपाल को यह बताने की कोशिश की जा रही है कि भारत सदैव एक अच्छे पड़ोसी की तरह नेपाल के हर संकट में मदद करता रहा है, इसलिए उसकी धरती का उपयोग भारत के विरुद्ध न हो यह सरकार को सुनिश्चित करना होगा। साथ ही चीन के नेपाल पर बढ़ते कर्ज के जाल को लेकर भी भारत ने सतर्क किया है।
