‘वंदे मातरम’ को मिला राष्ट्रगान के बाराबर दर्जा... मोदी कैबिनेट ने दी प्रस्ताव को मंजूरी, अपमान करने पर होगी सजा
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक सफलता के बाद केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक अहम निर्णय लिया गया है। इस फैसले के तहत अब राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को वही संवैधानिक सम्मान और दर्जा प्राप्त होगा, जो अब तक केवल राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को मिलता रहा है।
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में रखा गया था प्रस्ताव
मंगलवार को दिल्ली में आयोजित मोदी कैबिनेट की बैठक में माहौल काफी उत्साहजनक था। बैठक की शुरुआत में ही सभी मंत्रियों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड और अभूतपूर्व जीत के लिए पीएम मोदी का अभिनंदन किया। मंत्रियों ने कहा कि बंगाल की जीत ने देश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत की है। इसी सकारात्मक ऊर्जा के बीच सरकार ने राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़े इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी।
कानून में क्या होगा बदलाव?
सरकार ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ में संशोधन करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। इस संशोधन के लागू होने के बाद बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखे गए राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के मान-सम्मान के लिए वही कड़े नियम और प्रतिबंध लागू होंगे जो वर्तमान में राष्ट्रगान के लिए निर्धारित हैं। अब ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं बल्कि कानून की नजर में राष्ट्रगान के बराबर गरिमा वाला प्रतीक होगा। ‘वंदे मातरम’ का जानबूझकर अपमान करना या इसके गायन में बाधा डालना अब एक संज्ञेय अपराध माना जाएगा। जिस प्रकार राष्ट्रगान बजते समय सावधान की मुद्रा में खड़े होना और शिष्टाचार का पालन करना अनिवार्य है, वैसी ही अपेक्षा अब ‘वंदे मातरम’ के लिए भी की जाएगी।
सजा और दंड का प्रावधान
वर्तमान कानून के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा), भारत का संविधान या राष्ट्रगान का अपमान करने पर जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। प्रस्तावित बदलावों के बाद ‘वंदे मातरम’ को भी इसी कानूनी संरक्षण के दायरे में लाया गया है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ‘वंदे मातरम’ के गायन में बाधा डालता है या इसका अपमान करता है, तो उसे 3 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं। इससे पहले साल 2005 में इस कानून में संशोधन कर तिरंगे के अपमानजनक इस्तेमाल (जैसे कि कपड़ों के रूप में या अनुचित स्थानों पर) पर रोक लगाई गई थी।
वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर फैसला
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब पूरा देश ‘वंदे मातरम’ की रचना की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। दिसंबर 2025 में संसद के विशेष सत्र के दौरान, जब इस गीत की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा हो रही थी, तब कई सांसदों ने इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देने की मांग उठाई थी। सरकार का मानना है कि ‘वंदे मातरम’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का मुख्य आधार रहा है और इसने लाखों क्रांतिकारियों को प्रेरित किया है, इसलिए इसे सर्वोच्च सम्मान मिलना ही चाहिए।
