लखनऊ में गोमती बैराज का होगा कायाकल्प, सीएम योगी का निर्देश, आधुनिक गेटों से सुनिश्चित होगी निर्बाध जलापूर्ति
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित गोमती बैराज को आधुनिक और मॉडल बैराज सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने बैराज के पुराने और क्षतिग्रस्त वर्टिकल गेटों को बदलने का कार्य शुरू कर दिया है। इस परियोजना के पूरा होने से राजधानी की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत होगी। साथ ही जल सुरक्षा, बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरणीय संतुलन को भी नई तकनीक के जरिए बेहतर बनाया जा सकेगा।
सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग ने बताया कि वर्ष 1980 से 1983 के बीच निर्मित गोमती बैराज लंबे समय से राजधानी की जलापूर्ति व्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है। यह बैराज कुड़िया घाट पंपिंग स्टेशन पर 105.6 मीटर जलस्तर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे लाखों लोगों को निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होती है। बरसात के दौरान यह गोमती नदी के प्रवाह को नियंत्रित कर शहर को बाढ़ जैसी स्थिति से भी बचाता है।
उन्होंने बताया कि समय के साथ नदी के पानी की गुणवत्ता और लगातार उपयोग के कारण बैराज के गेटों में जैविक और रासायनिक क्षरण बढ़ गया था, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गेटों को चरणबद्ध तरीके से बदलने के निर्देश दिए थे। इसके तहत वर्ष 2024 में दो गेट बदले गए, जबकि 2025 में चार और गेटों का प्रतिस्थापन किया गया।
शेष चार गेटों के निर्माण और स्थापना का कार्य अब अंतिम चरण में तेजी से चल रहा है। मुख्य अभियंता (मैकेनिकल) उपेंद्र सिंह ने बताया कि नए गेटों का निर्माण बरेली स्थित आईएसओ प्रमाणित सिंचाई कार्यशाला में किया गया है। प्रत्येक गेट को दो हिस्सों में तैयार किया गया है, जिसमें ऊपरी भाग का वजन लगभग 16 टन और निचले हिस्से का वजन करीब 18 टन है। सिंह ने बताया कि सभी 10 गेटों की चौड़ाई 18 मीटर और ऊंचाई 4.95 मीटर रखी गई है। आधुनिक तकनीक और मजबूत संरचना से तैयार ये गेट लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम होंगे।
उन्होंने कहा कि गेट बदलने के दौरान राजधानी की पेयजल आपूर्ति प्रभावित न हो, यह विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी। इसे ध्यान में रखते हुए बैराज के अपस्ट्रीम हिस्से में कॉफरडैम बनाया गया है, ताकि मरम्मत और प्रतिस्थापन कार्य के दौरान जलस्तर बनाए रखा जा सके। उन्होंने कहा कि इससे कुड़िया घाट पंपिंग स्टेशन तक पर्याप्त पानी पहुंचता रहेगा और शहरवासियों को पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
