Mother's Day Special: मां... सृष्टि का शाश्वत आधार और प्रेम का अथाह सागर
लखनऊः मातृ दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि संवेदनाओं के उस विराट सागर को नमन करने का अवसर है, जिसकी गहराइयों में जीवन की प्रथम अनुभूति, प्रथम स्पंदन और प्रथम सीख संचित रहती है। ‘मां’ शब्द अपने आप में इतना व्यापक और अर्थगर्भित है कि उसके समक्ष समस्त भाषाएं स्वयं को सीमित अनुभव करती हैं। यह वह संबोधन है, जिसमें स्नेह की सरिता, त्याग का तप और करुणा का अक्षय स्रोत एक साथ प्रवाहित होते हैं।– डॉ. योगिता जोशी
मानव जीवन की यात्रा जब आरंभ होती है, तब वह पूर्णतः निर्भर, असहाय और अनजान होता है, किंतु मां अपने स्नेहिल स्पर्श, मधुर वाणी और अटूट विश्वास से उस नवजीवन को संबल प्रदान करती है। वह स्वयं कष्टों के पथ पर चलकर भी अपने शिशु के लिए सुख की राह प्रशस्त करती है। उसके त्याग का कोई लेखा-जोखा नहीं होता, न ही उसके प्रेम की कोई शर्त होती है। वह नि:स्वार्थता की वह जीवंत प्रतिमा है, जो बिना किसी अपेक्षा के केवल देना जानती है।
समाज और संस्कृति के निर्माण में मां की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और आधारभूत है। वह केवल एक व्यक्ति का पालन-पोषण नहीं करती, बल्कि एक संस्कारवान नागरिक का निर्माण करती है। उसके द्वारा दिए गए मूल्य, नैतिकता और जीवन-दृष्टि ही आगे चलकर समाज की दिशा और दशा निर्धारित करते हैं। इस प्रकार, मां केवल परिवार की धुरी नहीं, अपितु राष्ट्र निर्माण की प्रथम आधारशिला भी है।
वर्तमान युग में, जब जीवन की गति अत्यंत तीव्र हो चुकी है और पारिवारिक संबंधों में औपचारिकता का पुट बढ़ता जा रहा है, ऐसे में मातृत्व का यह निष्कलुष स्वरूप और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। मां आज भी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में उसी समर्पण और धैर्य का परिचय देती है, चाहे वह गृहिणी हो या कार्यरत महिला। वह अपने दायित्वों के अनेक आयामों को संतुलित करते हुए परिवार और समाज के मध्य एक सशक्त सेतु का कार्य करती है।
मातृ दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि हम उस व्यक्तित्व के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करें, जिसकी उपस्थिति हमारे जीवन को सार्थक बनाती है। किंतु यह भी सत्य है कि मां के प्रति सम्मान और प्रेम किसी एक दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, यह तो जीवन के प्रत्येक क्षण में हमारे आचरण और विचारों में परिलक्षित होना चाहिए।
अंततः मां वह शाश्वत शक्ति है, जो सृष्टि के प्रत्येक रूप में विद्यमान है। वह सृजन की आधारशिला है, करुणा की पराकाष्ठा है और प्रेम की परिभाषा है। उसके चरणों में निहित आशीर्वाद ही जीवन को दिशा, उद्देश्य और पूर्णता प्रदान करता है। मातृ दिवस के इस पावन अवसर पर, प्रत्येक हृदय से यही स्वर प्रस्फुटित होना चाहिए कि मां के प्रति हमारा सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हमारे संपूर्ण जीवन में प्रतिबिंबित हो।
