क्वालिटी ऑडिट :निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर शासन की रहेगी नजर
बरेली, अमृत विचार। सड़कों व पुलों के निर्माण में अब खानापूरी नहीं चलेगी। शासन ने भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए सभी बड़ी परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट की नई व्यवस्था लागू कर दी है। स्थानीय स्तर पर होने वाले बड़े निर्माण कार्यों में गड़बड़ियों पर अंकुश लगाने के लिए आईआईटी और अन्य प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों की मदद ली जाएगी। अपर मुख्य सचिव वित्त दीपक कुमार ने इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है। सूचना मंडलायुक्त, जिलाधिकारी को भेजी गई है।
नई व्यवस्था के तहत 25 करोड़ से अधिक की लागत वाली परियोजनाओं के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य होगा। वहीं, विशेष रूप से वह परियोजनाएं जिनकी लागत 100 करोड़ रुपये से अधिक है, उनकी निगरानी आईआईटी कानपुर, दिल्ली, रुड़की और बीएचयू जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान करेंगे। मध्यम श्रेणी की परियोजनाओं का ऑडिट राज्य स्तरीय संस्थानों जैसे एमएनआईटी प्रयागराज, एएमयू अलीगढ़ को सौंपा गया है। यह संस्थान निर्माण सामग्री, डिजाइन, सुरक्षा मानकों और कार्य की वास्तविक प्रगति की सूक्ष्मता से जांच करेंगे।
गुणवत्ता जांच की यह प्रक्रिया निर्माण के विभिन्न चरणों में पूरी की जाएगी। शासनादेश के अनुसार, परियोजनाओं के डिजाइन तैयार होने, 25, 50 व 75 प्रतिशत कार्य पूरा होने और अंत में कार्य संपन्न होने पर निरीक्षण करना अनिवार्य होगा। इसके लिए संबंधित विभागों और तकनीकी संस्थानों के बीच एमओयू साइन किया जाएगा। शासन ने ऑडिट के लिए शुल्क भी निर्धारित कर दिया है, जिससे अब बरेली मंडल में सड़कों और पुलों के निर्माण में पारदर्शिता आएगी और घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग पर पूरी तरह रोक लग सकेगी।
