क्रूज कल्चर : जितना रोमांच उतनी ही चुनौतियां

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Published By Pradeep Kumar
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भारत में क्रूज कल्चर को बढ़ावा देने के प्रमुख कारण बढ़ती आय और बदलता लाइफस्टाइल है। मध्यम वर्गीय युवाओं में अब पारंपरिक वेकेशन के बजाय लग्जरी और थीम-बेस्ड यात्राओं का क्रेज बढ़ा है। 

मध्यप्रदेश के जबलपुर (बरगी बांध) में हुए हादसे के बाद भारत में तेजी से बढ़ता क्रूज कल्चर सवालों के घेरे में है, दरअसल तैयारी भारत को 2029 तक एक प्रमुख क्रूज पर्यटन स्थल में बदलने की है। इस बीच ऐसा हादसा वाकई सचेत करने वाला है, जिसमें 13 पर्यटकों की जान चली गई और तमाम यात्रियों की जिंदगी जैसे-तैसे बची। अब सवाल यह है सुरक्षा की नजर से क्रूज के मानक क्या तय किए गए हैं। जैसे- उसमें लोगों को बैठाने की संख्या, सेफ्टी जैकेट या अन्य उपकरण, मेनटेनेंस, जिसमें उसके संचालन की समय सीमा भी तय हो? साथ ही मौसम का पूर्वानुमान भी? बीस साल पुराने क्रूज में अगर यह सबकुछ तय था, तो दुर्घटना के बिंदुओं को चिह्नित करना ही होगा।

अब इस संबध में सरकारी नीतियों पर गौर करें, तो पाएंगे कि सरकार द्वारा बंदरगाह शुल्कों को तार्किक बनाना, ई-वीजा की सुविधा देना और आधुनिक क्रूज टर्मिनलों का निर्माण करना, जैसे कदम इंडस्ट्री को बढ़ावा दे रहे हैं। इसी कड़ी में पर्यावरण के अनुकूल विकल्प भी तलाशे जा रहे हैं। जैसे दिल्ली और अन्य जगहों पर अब सोलर और इलेक्ट्रिक हाइब्रिड क्रूज भी उतारे जा रहे हैं, लेकिन क्रूज कल्चर के विस्तार के साथ ही सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना एक गंभीर विषय बना हुआ है।

यह विषय और भी संजीदा हो जाता है, जबकि हाल ही में मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी बांध में क्रूज हादसा हुआ। यह हादसा इस सेक्टर में कड़े सुरक्षा नियमों पर मंथन करने पर विवश करता है। इतना ही नहीं, गंगा जैसी पवित्र नदियों पर व्यावसायिक क्रूज के संचालन को लेकर कुछ स्थानीय और धार्मिक असंतोष की बातें भी सामने आती रही हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि हम पर्यटन इंडस्ट्री में बूम लाने को समुद्र के ग्लैमर को छोटी नदी तक उतारने को आमादा हैं, दरअसल  इसमें दो राय नहीं कि भारत में क्रूज कल्चर को बढ़ावा देने के प्रमुख कारण बढ़ती आय और बदलता लाइफस्टाइल है। खासकर मध्यम वर्ग और युवाओं में अब पारंपरिक वेकेशन के बजाय लग्जरी और थीम-बेस्ड यात्राओं का क्रेज बढ़ा है। पहले यह धनवान कहे जाने वालों तक सीमित था। इस क्षेत्र को समझें तो पाते हैं कि  भारत क्रूज भारत मिशन (सीबीएम), मैरीटाइम इंडिया विजन (एमआईवी-2030) और आईडब्ल्यूएआई के नेतृत्व वाली नई साझेदारियों के माध्यम से क्रूज पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसका लक्ष्य नदियों और तटों पर एक वैश्विक केंद्र बनना है।

इस कल्चर का उद्देश्य भी समझ लीजिए। यह छुट्टियों में घूमने का आनंद उठाने एक विकल्प है, जो समुद्री क्रूज (समुद्रों पर) और नदी क्रूज (अंतर्देशीय जलमार्गों पर) के माध्यम से यात्रा, आतिथ्य और दर्शनीय स्थलों को जोड़ने के साथ एक अनूठा सुखद अनुभव देता है। भारत का प्राकृतिक विस्तार इस इंडस्ट्री का आधार है, दरअसल भारत की 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा है, 12 प्रमुख और लगभग 200 छोटे बंदरगाह हैं और 111 राष्ट्रीय जलमार्ग हैं, जो 20,000 किलोमीटर से अधिक नौगम्य नदियों और नहरों को कवर करते हैं। 1,300 से अधिक द्वीप और तटीय राज्य भारत की समुद्री और अंतर्देशीय क्रूज पर्यटन क्षमता को बढ़ावा देते हैं।

जमीनी तौर पर समझें तो पाते हैं कि दिल्ली में यमुना के लिए इलेक्ट्रिक-सोलर हाइब्रिड नावों का उपयोग करके चार किलोमीटर लंबी पर्यावरण-अनुकूल क्रूज विकसित करने के लिए आईडब्ल्यूएआई और दिल्ली सरकार के बीच मार्च 2025 में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे, वहीं उसी समय जम्मू और कश्मीर के चेनाब, झेलम और रावी पर क्रूज विकास के लिए समझौता किया गया। इसी तरह मध्य प्रदेश और गुजरात में त्रिपक्षीय समझौते के तहत कुक्षी-सरदार सरोवर मार्ग पर क्रूज सेवाएं शुरू की गईं।

सच पूछिए तो क्रूज कल्चर के माध्यम से पर्यटन इंडस्ट्री को बूस्ट करना नदी क्रूज पर्यटन रोडमैप 2047 के तहत है। इसे समुद्री अमृत काल विजन 2047 के हिस्से के रूप में भी हम समझ सकते हैं। इसी कारण भारत को 2029 तक एक प्रमुख क्रूज पर्यटन स्थल में बदलने के उद्देश्य से 2024 में सीबीएम की शुरुआत की गई थी। बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के नेतृत्व में इसका लक्ष्य वित्त वर्ष 2023-24 में 4.71 लाख से क्रूज यात्री यातायात को 2029 तक दोगुना करना है। इस मिशन को 3 चरणों में कार्यान्वित किया जाएगा, जिसमें टर्मिनल विकास, डिजिटलीकरण, डीकार्बोनाइजेशन और क्षेत्रीय गठबंधन (यूएई, मालदीव, सिंगापुर) शामिल हैं।

वहीं, एमआईवी, 2030 का लक्ष्य अगले दशक में आठ गुना वृद्धि के लक्ष्य के साथ भारत को एक प्रमुख वैश्विक क्रूज पर्यटन केंद्र बनाना है। यह महासागरीय, तटीय, द्वीपीय और अंतर्देशीय क्रूज विकास पर केंद्रित होगा, जबकि, 2047 के लिए एक राष्ट्रीय क्रूज अवसंरचना मास्टर प्लान और ई-वीजा और ई-क्लियरेंस जैसी पहल का उद्देश्य कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा देना है।

नदी क्रूज पर्यटन पर ध्यान इसलिए भी केंद्रित किया गया क्योंकि नदी क्रूज पर्यटन भारत की जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत का उपयोग करने वाला एक उभरता हुआ क्षेत्र बन सकता है। ऐसे में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) गंगा, ब्रह्मपुत्र और केरल बैकवाटर जैसी नदियों के किनारे नौवहन अवसंरचना, टर्मिनल और विरासत सर्किट विकसित कर रहा है।

भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल (आईबीपी) के माध्यम से भारत अंतरराष्ट्रीय क्रूज यात्राओं को भी बढ़ावा दे रहा है। इसी क्षेत्र का एक प्रमुख आकर्षण एमवी गंगा विलास है , जो दुनिया की सबसे लंबी नदी क्रूज है, जिसे 2023 में लॉन्च किया गया था और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में सूचीबद्ध है ।

बहरहाल, इस क्षेत्र को तय मानकों पर विकसित करने के उद्देश्य से ही पहले अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद (आईडब्ल्यूडीसी) को लॉन्च किया गया था। इसके चार स्तंभ हैं - बुनियादी ढांचा, एकीकरण, पहुंच और नीति। क्या ताजा हादसे के बाद इन सभी स्तम्भों की मजबूती परखी नहीं जानी चाहिए?     

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