विकास आत्मनिर्भरता और तकनीक का नया भारत

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
On

दुनिया की आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक तनावों के बीच भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती से आगे बढ़ाया है। हाल के आंकड़े बताते हैं कि भारत के निर्यात में 4.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

0
राजेश श्रीनेत, वरिष्ठ पत्रकार

 

मई 2026 में देश का सामाजिक आर्थिक परिदृश्य ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां विकास, तकनीक और आत्मनिर्भरता भारत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रहे हैं। दुनिया की आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक तनावों के बीच भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती से आगे बढ़ाया है। हाल के आंकड़े बताते हैं कि भारत के निर्यात में 4.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि रक्षा उत्पादन में 174 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि बदलते भारत की तस्वीर है। दूसरी ओर खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण मुद्रास्फीति लगभग चार प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिससे आम लोगों की चिंता भी बढ़ी है। इन सबके बीच डिजिटल जनगणना की शुरुआत, नीति आयोग का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर @2047 रोडमैप और खेती में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का बढ़ता उपयोग यह दिखाता है कि भारत अब तकनीक के सहारे नए भविष्य की ओर बढ़ रहा है।

भारत की निर्यात वृद्धि यह साबित करती है कि दुनिया भारतीय उत्पादों और सेवाओं पर भरोसा कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने मेक इन इंडिया और उत्पादन आधारित योजनाओं के माध्यम से देश में उद्योगों को मजबूत करने की कोशिश की है। इसका असर अब दिखाई देने लगा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयों, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और तकनीकी सेवाओं के निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दुनिया की कई बड़ी कंपनियां अब भारत को एक मजबूत विनिर्माण केंद्र के रूप में देख रही हैं। इसका कारण यह भी है कि कई देश चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं और भारत को एक भरोसेमंद विकल्प मान रहे हैं। इससे भारत को रोजगार और निवेश दोनों के क्षेत्र में लाभ मिल रहा है।

रक्षा उत्पादन में 174 प्रतिशत की वृद्धि भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। लंबे समय तक भारत हथियारों और रक्षा उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहा है, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। देश में मिसाइल, ड्रोन, आधुनिक हथियार और रक्षा तकनीक का निर्माण तेजी से बढ़ा है। इससे न केवल देश की सुरक्षा मजबूत हो रही है, बल्कि रोजगार और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिल रहा है। निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की भागीदारी ने इस क्षेत्र में नई ऊर्जा पैदा की है। आत्मनिर्भर भारत का सपना अब रक्षा क्षेत्र में सच होता दिखाई दे रहा है, हालांकि यह भी जरूरी है कि गुणवत्ता और अनुसंधान पर लगातार ध्यान दिया जाए, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा कर सके।

इन उपलब्धियों के बीच बढ़ती महंगाई सरकार और आम जनता दोनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। सब्जियों, दालों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों का खर्च बढ़ा है। जलवायु परिवर्तन भी इसके पीछे एक बड़ा कारण है। अनियमित बारिश और मौसम की खराब परिस्थितियों के कारण खेती प्रभावित हो रही है, जिसका असर बाजार में दिखाई देता है। यही वजह है कि आर्थिक विकास के आंकड़े तभी मायने रखते हैं, जब आम लोगों का जीवन भी आसान हो। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखा जाए।

अप्रैल 2026 से शुरू हुई डिजिटल जनगणना को भारत के प्रशासनिक इतिहास का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। पहली बार इतने बड़े स्तर पर डिजिटल तकनीक का उपयोग करके जनगणना की जा रही है। इससे सरकार को जनसंख्या, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाओं से जुड़ी सही जानकारी जल्दी और आसानी से मिल सकेगी। इसका फायदा यह होगा कि सरकारी योजनाएं जरूरतमंद लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंच सकेंगी। डिजिटल जनगणना से पारदर्शिता भी बढ़ने की उम्मीद है, हालांकि इसके साथ डेटा सुरक्षा और गोपनीयता जैसे सवाल भी जुड़े हुए हैं। लोगों का निजी डेटा सुरक्षित रखना सरकार की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

नीति आयोग द्वारा तैयार डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर @2047 रोडमैप भारत के भविष्य की नई सोच को दिखाता है। इसका उद्देश्य यह है कि तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। आधार, यूपीआई और डिजिलॉकर जैसी डिजिटल सेवाओं ने पहले ही करोड़ों लोगों के जीवन को आसान बनाया है। अब सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और अन्य क्षेत्रों में डिजिटल सुविधाओं को और मजबूत करना चाहती है। इस योजना का लक्ष्य केवल तकनीकी विकास नहीं, बल्कि समावेशी विकास है, ताकि गांव और शहर के बीच की दूरी कम हो सके, लेकिन यह भी सच है कि आज भी देश के कई हिस्सों में इंटरनेट और डिजिटल सुविधाओं की कमी है, इसलिए डिजिटल विकास तभी सफल होगा, जब समाज के हर व्यक्ति तक इसकी पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।

खेती के क्षेत्र में एआई का उपयोग भी भारत के लिए नई संभावनाएं लेकर आया है। किसान अब मौसम की जानकारी, मिट्टी की जांच और फसल प्रबंधन के लिए नई तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। इससे खेती की लागत कम हो सकती है और उत्पादन बढ़ सकता है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में यह बदलाव बहुत महत्वपूर्ण है। अगर छोटे किसानों तक भी यह तकनीक पहुंचे, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिल सकती है, हालांकि अभी भी कई किसानों के पास डिजिटल संसाधनों और तकनीकी जानकारी की कमी है, इसलिए सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता को मजबूत करना होगा।

संबंधित समाचार