यूपी बना देश का सबसे कठोर गोरक्षा कानून वाला राज्य, आर्थिक मॉडल का ढांचा तैयार 

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Published By Anjali Singh
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गोवध और गोतस्करी पर सख्त कार्रवाई से उप्र. बना देश का सबसे कठोर गोरक्षा कानून वाला राज्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गोसंरक्षण और गोवंश सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते नौ वर्षों में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। गोसंरक्षण को केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, पशुपालन और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का सशक्त मॉडल बनकर उभर रहा है। वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश गोवध और गोतस्करी के विरुद्ध सबसे कठोर कानूनी प्रावधानों वाले राज्यों में गिना जाता है।

उप्र. गो-वध निवारण अधिनियम मूल रूप से वर्ष 1955 में लागू किया गया था, लेकिन वर्ष 2020 में इसमें व्यापक संशोधन किए गए। संशोधित कानून के तहत गोवध करने या उसके प्रयास पर 3 से 10 वर्ष तक की कठोर कारावास और 3 लाख से 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया। दोबारा अपराध करने पर दंड और अधिक कठोर हो सकता है।

सरकार ने गोवंश के प्रति क्रूरता को भी गंभीर अपराध माना है। गाय को भोजन-पानी न देना, घायल करना या असुरक्षित स्थिति में छोड़ना भी दंडनीय है। इतना ही नहीं, गोवंश के अवैध परिवहन में इस्तेमाल वाहनों की जब्ती के निर्देश हैं। यदि वाहन स्वामी यह साबित नहीं कर पाता कि अपराध उसकी जानकारी के बिना हुआ, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही ऐसे मामलों को गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है। फरार आरोपियों की तस्वीरें सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करने की व्यवस्था भी की गई है।

नौ वर्षों में 36 हजार गिरफ्तार, 83.32 करोड़ की संपत्तियां जब्त

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 से 2025 के बीच गोवध और गोतस्करी से जुड़े मामलों में लगभग 36 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया। 13,793 आरोपियों पर गुंडा एक्ट, 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट तथा 178 आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया। इसके अतिरिक्त 83.32 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त की गईं।

गोसंरक्षण का आर्थिक मॉडल भी बना रही सरकार

7,500 गोसंरक्षण केंद्रों में 13 लाख गोवंश संरक्षित हैं, 20वीं पशुगणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश में लगभग 1.88 करोड़ गोवंश हैं। इनमें से करीब 13 लाख गोवंश का संरक्षण 7,500 से अधिक गो-संरक्षण केंद्रों के माध्यम से किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री सहभागिता योजना से पशुपालकों को सहायता

मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत अब तक 1.25 लाख से अधिक पशुपालकों को 1.80 लाख से ज्यादा गोवंश उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार प्रति गोवंश 1,500 रुपये प्रतिमाह डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में भेज रही है।

दुग्ध उत्पादन व प्राकृतिक खेती में वृद्धि

प्रदेश में दुग्ध उत्पादन वर्ष 2016-17 के 277 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 388 लाख मीट्रिक टन से अधिक हो गया है। साथ ही राज्य सरकार गोशालाओं को गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल से जोड़ रही है। जैविक खाद, प्राकृतिक कीटनाशक और गो-आधारित उत्पादों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और खेती की लागत कम करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

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