चुनाव खत्म होते ही, 'संकट' याद आ गया!... पीएम मोदी की अपील पर अखिलेश का तंज
लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जनता से कम खर्च करने और खाने के तेल की खपत कम करने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर तंज करते हुए सोमवार को कहा कि यह गुजारिश सरकार की अपनी असफलता की 'स्वीकारोक्ति' है।
अखिलेश यादव ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा तेलंगाना में एक रैली में आम जनता से पश्चिम एशिया में युद्ध से उपजे हालात में ईंधन का समझदारी से इस्तेमाल करने और सोने की खरीद तथा विदेश यात्रा को एक साल के लिए टालने जैसे कई उपाय सुझाए जाने पर तंज करते हुए 'एक्स' पर कहा, "चुनाव ख़त्म होते ही, 'संकट' याद आ गया! दरअसल देश के लिए 'संकट' सिर्फ़ एक है और उसका नाम है : 'भाजपा'।"
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो 'पांच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था' कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है।"
उन्होंने प्रधानमंत्री की अपील पर कटाक्ष करते हुए कहा, "सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं खरीद पा रही है। भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। हमारी बात गलत लग रही हो तो 'लखनऊ से लेकर गोरखपुर' तक पता कर लीजिए या 'अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी' तक।"
अखिलेश यादव ने सवाल करते हुए कहा, "वैसे सारी पाबंदियां चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं है? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हजारों चार्टर हवाई यात्राएं कीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में वीडियो कॉन्फ्रेंस से ही प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियां जनता के लिए ही हैं क्या?" उन्होंने प्रधानमंत्री की अपील की आलोचना करते हुए कहा, "ये अपील भाजपा सरकार की अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। दरअसल वोट मिलते ही भाजपा का खोट सामने आ गया।"
सपा प्रमुख ने कहा कि इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाज़ार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफ़रातफ़री फैलाना नहीं। यादव ने कहा कि भाजपा के लोग अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो अपनी नाकामी को स्वीकार करें।
उन्होंने केंद्र की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि वैसे भी इन हालात की असली वजह विदेश नीति के मामले में देश की परंपरागत 'गुट निरपेक्षता' की नीति से भाजपा सरकार का हटकर कुछ गुटों के पीछे, कुछ ख़ास वजहों और दबावों की वजह से चलना है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका ख़ामियाज़ा देश की जनता को महंगाई, बेरोज़गारी और मंदी की मार के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
सपा प्रमुख ने आरोप लगाते हुए कहा, "भाजपा ने चुनावी घपलों से राजनीति को प्रदूषित कर दिया है, नफरत फैला कर समाज के सौहार्द को बर्बाद कर दिया है, अपने चाल-चलन से भाजपाइयों ने संस्कृति-संस्कार को कलुषित कर दिया है, साधु-संतो पर प्रहार और आरोप लगाकर धर्म तक को नहीं छोड़ा है और अब अर्थव्यवस्था का रोना रो रहे हैं।"
दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बुरे असर से लोगों को बचाने की अपनी सरकार की कोशिशों का रविवार को जिक्र करते हुए अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ईंधन का समझदारी से इस्तेमाल करने और सोने की खरीद तथा विदेश यात्रा को एक साल के लिए टालने जैसे कई उपाय सुझाए।
मोदी ने तेलंगाना में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए विदेशी मुद्रा बचाने के लिए पेट्रोल और डीज़ल की खपत कम करने, शहरों में मेट्रो रेल सेवाओं का इस्तेमाल करने, कारपूलिंग करने, इलेक्ट्रिक वाहनों का ज्यादा इस्तेमाल करने, पार्सल भेजने के लिए रेलवे सेवाओं का उपयोग करने और घर से काम करने का सुझाव दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा, "कोविड-19 महामारी के दौरान हमने घर से काम करना, वर्चुअल मीटिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंस और कई दूसरे तरीके अपनाए थे। हमें उनकी आदत हो गई थी। आज के समय की जरूरत है कि हम उन तरीकों को फिर से अपनाएं।" उन्होंने विदेशी मुद्रा बचाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए खाने के तेल की खपत कम करने, रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल घटाने, प्राकृतिक खेती और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की भी अपील की।
