हाईकोर्ट का सख्त आदेश: लखनऊ के जिलाधिकारी कोर्ट में हाजिर हों, गुमराह करने का आरोप

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक अवमानना याचिका पर आदेश पारित करते हुए कहा है कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि जिलाधिकारी लखनऊ कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। लिहाजा वह मंगलवार को कोर्ट के समक्ष उपस्थित हों। उनके विरुद्ध अवमानना प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की एकल पीठ ने अखिलेश कुमार पटेल और एक अन्य की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर दिया है। याची की ओर से दलील दी गई कि रेरा द्वारा वीएमएस बिल्ड टेक प्राइवेट लिमिटेड से 65,88,488 रुपये का रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया गया था। रिट कोर्ट ने 8 अगस्त 2023 को जिलाधिकारी को उक्त रिकवरी सर्टिफिकेट के अनुपालन में तीन माह में वसूली का आदेश दिया था। 

कहा गया कि अभे एटक रिट कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं हो सका है, जिस कारण अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ी। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जिलाधिकारी को शपथ पत्र दाखिल कर बताने को कहा था कि रिट कोर्ट के आदेश के अनुपालन में अब तक वसूली क्यों नहीं की जा सकी। उक्त बिल्डर का चेक बाउंस होने के बावजूद उसके विरुद्ध एनआई एक्ट के तहत परिवाद क्यों नहीं दाखिल किया गया। उक्त आदेश के अनुपालन में जिलाधिकारी की ओर से शपथ पत्र तो दाखिल किया गया, लेकिन कोर्ट ने पाया कि उसके द्वारा पूछे गए प्रश्नों के जवाब व प्रासंगिक तथ्यों का शपथ पत्र में भाव है। इस पर कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि जिलाधिकारी लखनऊ इस न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास रहे हैं।

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