बीएचयू प्रश्न पत्र विवाद : अजय राय बोले- नफरत और विभाजन की राजनीति से शिक्षा संस्थानों को दूर रखा जाना चाहिये

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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वाराणसी।  काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के इतिहास विभाग की स्नातकोत्तर चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षा संस्थानों को नफरत और विभाजन की राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए तथा हर जाति का सम्मान और सामाजिक समरसता देश की पहचान है। 

बीएचयू में एमए इतिहास की परीक्षा में पूछे गए प्रश्न "ब्राह्मणवादी पितृसत्ता से आप क्या समझते हैं? चर्चा कीजिए कि किस प्रकार ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति में बाधा डाली?" को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। 

अजय राय ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य किसी जाति, वर्ग या समुदाय के प्रति दुर्भावना उत्पन्न करना नहीं, बल्कि समाज को ज्ञान, संवेदनशीलता और एकता की दिशा देना होता है। उन्होंने कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में इस प्रकार के शब्दों का परीक्षा प्रश्न के रूप में इस्तेमाल पूरे समाज को सोचने पर मजबूर करता है। 

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में शिक्षा संस्थानों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा थोपी जा रही है, जिससे समाज में वैचारिक टकराव और जातीय विभाजन को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में ब्राह्मण समाज ज्ञान, शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक रहा है तथा भारतीय दर्शन, वेद, उपनिषद और संस्कृत साहित्य को आगे बढ़ाने में उसका ऐतिहासिक योगदान रहा है। 

कांग्रेस नेता ने कहा कि किसी भी जाति को अपमानित करने या संदेह के घेरे में खड़ा करने की मानसिकता भारतीय संस्कृति और संविधान दोनों के विरुद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और भर्ती परीक्षाओं में ऐसे विषय शामिल किए जा रहे हैं, जो समाज के भीतर जातीय तनाव और विरोधाभास पैदा कर सकते हैं। 

उन्होंने उत्तर प्रदेश की दरोगा भर्ती परीक्षा में पूछे गए कथित विवादित प्रश्न और "घूसखोर पंडित" नामक फिल्म के विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि अब बीएचयू में इस प्रकार का प्रश्न यह दर्शाता है कि शिक्षा व्यवस्था को वैचारिक एजेंडे के तहत प्रभावित किया जा रहा है। अजय राय ने कहा कि विश्वविद्यालयों का कार्य समाज को जोड़ना है, तोड़ना नहीं। 

शिक्षा संस्थानों को लोकतांत्रिक बहस, संविधान, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता का केंद्र होना चाहिए, न कि राजनीतिक प्रयोगशाला। उन्होंने कहा कि इतिहास और समाजशास्त्र जैसे विषयों को तथ्यों और संतुलित दृष्टिकोण के आधार पर पढ़ाया जाना चाहिए। 

उन्होंने मांग की कि शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक और वैचारिक हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाए तथा पाठ्यक्रम और परीक्षाओं में ऐसे विवादित विषयों को शामिल करने से बचा जाए, जो समाज में विभाजन पैदा करें। कांग्रेस नेता ने विश्वविद्यालय प्रशासन से प्रश्न वापस लेने और भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति रोकने की मांग भी की।  

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