यूपी में इंजीनियरिंग संस्थानों को मिलेगी राष्ट्रीय रैंकिंग, योगी सरकार का रोजगार, रिसर्च और इंडस्ट्री कनेक्ट से जोड़ने पर फोकस
लखनऊ, अमृत विचार: योगी सरकार ने प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इंजीनियरिंग कॉलेजों और तकनीकी विश्वविद्यालयों को नैक, एनआईआरएफ और एनबीए मानकों के अनुरूप तैयार करने के लिए व्यापक गुणवत्ता सुधार अभियान शुरू किया गया है। सरकार का लक्ष्य तकनीकी संस्थानों को केवल डिग्री देने वाले केंद्रों से आगे बढ़ाकर रिसर्च, नवाचार और रोजगारपरक शिक्षा के हब के रूप में विकसित करना है।
तकनीकी शिक्षा विभाग ने इसके लिए स्टेट क्वालिटी फ्रेमवर्क (एसक्यूएफ) लागू किया है। इस फ्रेमवर्क के तहत प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अकादमिक गुणवत्ता, फैकल्टी डेवलपमेंट, रिसर्च आउटपुट, छात्र सुविधाओं और प्लेसमेंट आधारित मूल्यांकन को संस्थागत रूप दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे तकनीकी संस्थानों की राष्ट्रीय रैंकिंग और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में सुधार होगा।
प्रदेश में वर्तमान समय में 14 राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, एचबीटीयू, एमएमएमयूटी और एकेटीयू जैसे प्रमुख तकनीकी विश्वविद्यालयों के साथ-साथ 771 निजी इंजीनियरिंग एवं फार्मेसी संस्थान संचालित हो रहे हैं। इतने बड़े नेटवर्क को एक समान गुणवत्ता ढांचे से जोड़ना योगी सरकार की तकनीकी शिक्षा सुधार नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार संस्थानों के लिए सेल्फ असेसमेंट प्रोफॉर्मा तैयार किया गया है, जिससे कॉलेज स्वयं अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक स्थिति का मूल्यांकन कर सकेंगे। साथ ही संस्थानों को एसआईआरएफ (स्टेट इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क) प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है, ताकि डेटा आधारित पारदर्शी मूल्यांकन संभव हो सके।
सरकार प्रदेशभर में जागरूकता कार्यशालाएं भी आयोजित करेगी, जिनमें संस्थानों को नैक दस्तावेजीकरण, रिसर्च, फैकल्टी सुधार और छात्र सुविधाओं से जुड़े मानकों की जानकारी दी जाएगी। तकनीकी शिक्षा विभाग का मानना है कि लंबे समय तक केवल सीट भरने तक सीमित रहे कई तकनीकी संस्थानों को अब गुणवत्ता आधारित मॉडल की ओर ले जाना जरूरी है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप सरकार तकनीकी शिक्षा में इंडस्ट्री कनेक्ट, स्किल डेवलपमेंट, रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा दे रही है। इसे प्रदेश के “एक ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” लक्ष्य से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि बेहतर तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षित मानव संसाधन से निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
‘सीट फिलिंग मॉडल’ से ‘क्वालिटी मॉडल’ की ओर बदलाव
तकनीकी शिक्षा विभाग का मानना है कि प्रदेश के कई संस्थान लंबे समय तक केवल प्रवेश और सीट भरने तक सीमित रहे। अब सरकार उन्हें राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता, रिसर्च और रोजगार आधारित शिक्षा मॉडल की ओर ले जाने की तैयारी में है।
ये भी पढ़ें :
यूपी पुलिस भर्ती: मुख्य सचिव ने दिए नकलविहीन और पारदर्शी एग्जाम के कड़े निर्देश, 28.86 लाख अभ्यर्थियों के लिए 'अभेद्य' सुरक्षा चक्र
