यूपी पुलिस रेडियो विभाग में फंसा पेंच, बिना इस्तीफे के नियुक्ति देने से डीजी टेलीकॉम का इनकार
- डीजीपी से मिलने के लिए गेट पर हुए एकजुट, नहीं हो सकी मुलाकात - 28 अप्रैल को मुख्यमंत्री ने आरक्षियों को सौंपा था नियुक्ति पत्र
अमृत विचार, लखनऊ। यूपी पुलिस के रेडियो विभाग में नियुक्त हुए आरक्षियों के सामने संकट की स्थिति आ गई है। विभाग में नवनियुक्त हुए आरक्षी जब ज्वाइनिंग करने पहुंचे तो डीजी टेलीकाम आशुतोष पांडेय ने यह कहकर वापस कर दिया कि पहले मूल विभाग से इस्तीफा देकर आओ। हालांकि आरक्षी कार्यमुक्ति पत्र लेकर पहुंचे हुए थे, जिसे नहीं माना गया। एसी स्थिति में सैकड़ों आरक्षी डीजीपी से मिलने पुलिस मुख्यालय पहुंचे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। हालांकि प्रकरण आईजी स्थापना के पास पहुंचा हुआ है, लेकिन स्थापना विभाग फिलहाल मौन है।
गौरतलब हो कि पुलिस के रेडियो विभाग में प्रधान परिचालक एवं प्रधान परिचालक (यांत्रिक) के 936 पदों की परीक्षा हुई थी। जिसका परिणाम 27 जून 2025 को आया था। इस परीक्षा में पीएसी, कारागार एवं सिविल पुलिस में नौकरी कर रहे 2018, 2019, 2020 और 2021 बैच के तमाम आरक्षियों ने भी परीक्षा दी थी, जिनका चयन हुआ था। इन आरक्षियों ने रेडियो विभाग ज्वाइन करने से पहले अपने मूल विभाग में विभागाध्यक्षों से कार्यमुक्ति का पत्र भी प्राप्त कर लिया है। लेकिन इस पत्र के आधार पर आरक्षियों को रेडियो विभाग में नियुक्ति नहीं दी गई। स्थापना विभाग के एसपी अमृत मिश्रा से मंगलवार को आरक्षियों की मुलाकात हुई थी, जहां उन्हें आश्वासन मिला। बुधवार को पुनः आरक्षी जब पुलिस मुख्यालय पहुंचे तो आईजी स्थापना राजेश मोदक से मुलाकात हुई, हालांकि उन्होंने आश्वासन के अलावा कोई राहत नहीं दी।
क्यों इस्तीफा नहीं दे रहे आरक्षी
डीजीपी से मिलने पहुंचे आरक्षी 2018 बैच से लेकर 2021 बैच तक के हैं। इस्तीफा देकर ज्वाइनिंग करने से विगत कार्यकाल की सेवा नहीं जुड़ेगी। दूसरा कारण यह है कि रेडियो विभाग की इन नियुक्तियों से जुड़ी एक रिट हाईकोर्ट में विचाराधीन है। हाईकोर्ट का फैसला नकाराक्तमक होने की स्थिति में यह यह आरक्षी मूल विभाग में वापस नहीं हो पाएंगे। एसे में दोनों विभागों से बाहर हो जाएंगे। धारणाधिकार के तहत यह आरक्षी दो वर्ष के अंदर मूल विभाग में वापसी भी कर सकेंगे, लेकिन इस्तीफा देने के बाद कोई वापसी नहीं।
